कुहरे की ठंडी चादर से मंगलवार को शहर व गांव ढंके रहे। सुबह आठ बजे तक सूर्य की किरणें कुहरे की परत के सामने फीकी रहीं। कुहरे के कारण सफर कर रहे यात्रियों को भी काफी परेशानी हुई। घना कुहरा होने के कारण ट्रेन तो लेट हुई हीं रोडवेज की बसें भी विलंब से रवाना हुईं। ऐसे यात्री रेलवे स्टेशन और रोडवेज बस अड्डे पर ठिठुरते रहे।
तीन दिन से कुहरे का असर जारी है। रात 10 बजते ही कुहरा अपना असर दिखाना शुरू किया तो मंगलवार की सुबह आठ बजे तक शहर से गांव तक ढंक गया। कुहरा पड़ने के कारण गरीबरथ और पद्मावत ट्रेन तीन घंटे व पंजाममेल, जनता एक्सप्रेस, बीएल पैसेंजर आधा घंटा देर से स्टेशन पहुंचीं। ट्रेनें लेट होने के कारण यात्री रेलवे स्टेशन पर ठिठुरते हुए आने का इंतजार करते रहे। स्टेशन पर अलाव की व्यवस्था न होने से यात्री और भी परेशान रहे।
इतना ही नहीं रोडवेज बस अड्डे से भी बसें देर से निकलीं। यहां भी स्टेशन जैसा ही हाल रहा। कुहरे के बीच ठिठुरते हुए यात्री यहां भी बसों के रवाना होने का इंतजार करते रहे। सुबह सात बजे तक स्थिति काफी बदतर थी। चारपहिया तो दूर बाइक से सफर करने वाले यात्री भी कुहरे की वजह से परेशान रहे। सुबह आठ बजे तक सूर्य की किरणों की गर्मी बेअसर रही। ठंडी के कारण लोग सुबह देर तक गर्म कपड़ों में लिपटे रहे। 10 बजे कि बाद चटख धूप हुई तो लोग राहत महसूस किए।