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शबे बारात कल, घरों में रहकर पुरखों के लिए करेंगे दुआएं

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गुरूवार को शबे बारात है। जिसका मुस्लिम समाज के लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है। कब्रिस्तान जाकर पुरखों की कब्रों को रोशन करने के साथ उनकी मगफिरत के लिए दुआएं करते हैं। नियाज व फातिहा भी की जाती है। इस बार घरों में रहकर लोगों को इबादत करनी होगी। कब्रिस्तान में प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है। ताकि वहां पर एक साथ भीड़ एकत्र न हो।
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शबे बारात वाली रात की फजीलत है। इसकी आमद के साथ ही पाक रमजान माह का आगाज होता है। जुमेरात यानि गुरूवार को शबे बारात है। हर साल की तरह इस बार लोग शबे बारात पर कब्रिस्तान जाकर पुरखों की कब्रों को रोशन करने के साथ ही मगफिरत की दुआ नहीं कर सकेंगे। इतना ही नहीं नियाज फातिहा भी अपने घरों में रहकर करना होगा। गुलशने मदीना मस्जिद के मौलाना समीउल्ला साहब का कहना है कि लोग अपने घरों में रहकर इबादत करें। बाहर निकलकर भीड़ जुटाने की जरूरत नहीं है। माइनारटीज वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष मौलाना ताजदार अहमद का कहना है कि कोरोना जैसी महामारी को रोकने के लिए देश में लाकडाउन लागू है। लोगों को सामाजिक दूरी बनाकर इस महामारी को भगाना है।
ऐसे हालात में जब मस्जिदों में बहुत से लोगों को एक साथ नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी गई है तो भीड़ लगाने से सभी को बचना होगा। अपने पुरखों की मगरिफरत के लिए घरों में ही कुरान पाक की तिलावत करें। अपना समय इबादत में गुजारे। ताकि दुनिया पर आई महामारी से लोग महफूज हो सकें। चांद तारा कब्रिस्तान के संरक्षक मुख्तार खान ने बताया कि शबे बारात पर कब्रिस्तान पर भीड़ न जुटे। इसके लिए प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। एक समय में लोगों की काफी भीड़ एकत्र होगी। इसलिए ऐसा कदम उठाया जा रहा है ताकि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन पूरी तरह से हो सके।
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