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कोरोना की तीसरी लहर को लेकर बेपरवाह है स्वास्थ्य विभाग

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कोरोना की दूसरी लहर में मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से मचे हाहाकार और मौतों के बाद भी स्वास्थ्य महकमा लापरवाह बना है। ऑक्सीजन की कमी को दूर करने और कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए शासन ने मेडिकल कॉलेज में दो सौ बेड के लिए प्रति मिनट एक हजार लीटर ऑक्सीजन की सप्लाई करने के लिए नया प्लांट लगाने का निर्देश दिया था। अफसरों की लापरवाही का आलम यह है कि अभी तक आक्सीजन प्लांट के सिर्फ पिलर खड़े किए जा सके हैं। यही हाल रहा तो कोरोना की तीसरी लहर में एक बार फिर जिले के लोगों को भारी मुसीबत झेलनी पड़ सकती है।
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जिला अस्पताल को उच्चीकृत कर मेडिकल कॉलेज बनाया गया है। जिला अस्पताल में पहले से एक ऑक्सीजन प्लांट है, लेकिन इसकी क्षमता बहुत कम है। इस प्लांट से तीस बेड के लिए प्रति मिनट सिर्फ 120 लीटर ऑक्सीजन की सप्लाई हो सकती है। इसके अलावा आए दिन इस प्लांट में कमियां बनी रहती हैं। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान भी ऑक्सीजन प्लांट ने धोखा दे दिया था। जिससे मरीजों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया था। सिलिंडर और आक्सीजन कंस्ट्रेटर के भरोसे किसी तरह मरीजों के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई। इसके अलावा कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद अस्पताल में आक्सीजन के लिए हाहाकार मच गया था।
कोरोना की दूसरी लहर थमने के बाद शासन ने मेडिकल कॉलेज में बड़ा ऑक्सीजन प्लांट लगाने का निर्देश दिया था। जिससे दो सौ बेड के लिए प्रति मिनट एक हजार लीटर आक्सीजन की सप्लाई हो सकेगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञ अगस्त-सितंबर में कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका जता रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी मेडिकल कॉॅलेज में नए आक्सीजन प्लांट के निर्माण में लापरवाही बरती जा नरही है।
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अभी तक प्लांट तैयार करने के लिए सिर्फ पिलर ही खड़े किए जा सके हैं। ऐसे में इसके अगस्त-सितंबर तक तैयार होने की उम्मीद नहीं है। लखनऊ की कार्यदायी संस्था ने पिलर खड़े करने के बाद काम बंद कर दिया है। अभी तक किसी तरह के उपकरण भी नहीं आए हैं। ऐसे में मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद फिर आक्सीजन के लिए हाहाकार मच सकता है। अफसरों की लापरवाही लोगों पर भारी पड़ सकती है।
15 मई तक बनकर तैयार होना था प्लांट
कोरोना की दूसरी लहर के पीक पर होने के समय आक्सीजन की कमी को लेकर मचे हाहाकार के बीच शासन ने मेडिकल कालेज में ऑक्सीजन प्लांट लगाने का निर्देश दिया था। नए प्लांट से प्रति मिनट एक हजार लीटर आक्सीजन की सप्लाई होनी है। पंद्रह मई तक प्लांट का निर्माण कार्य पूरा कर लेना था, लेकिन अभी तक सिर्फ पिलर ही खड़े किए जा सके हैं।
किसी सीएचसी में नहीं लग सका प्लांट
कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए जिले के दस सीएचसी-पीएचसी में छोटे ऑक्सीजन प्लांट लगाने जाने की तैयारी थी, लेकिन अभी तक कहीं नींव भी नहीं डाली जा सकी है। कोरोना संक्रमण की रफ्तार थमने के बाद प्रशासन के साथ स्वास्थ्य विभाग के अफसर भी पूरी तरह लापरवाह हो गए हैं। यह लापरवाही लोगों की जान पर भारी पड़ सकती है।
मेडिकल कालेज पीडियाट्रिक्स में वार्ड करीब-करीब बनकर तैयार हो गया है। ऑक्सीजन प्लांट के लिए कार्यदायी संस्था को पत्र लिखा गया है। सीएचसी और पीएचसी के बारे में सीएमओ ही जानकारी दे सकते हैं।
डॉ. आर्यदेश दीपक, प्राचार्य, स्वशाषी मेडिकल कॉलेज
पट्टी, लालगंज और कुंडा के दस अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाने की तैयारी की जा रही है। शासन को पत्र भेजा गया है। हरी झंडी मिलते ही कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
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डॉ. सीपी शर्मा, डिप्टी सीएमअो
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