राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में दवाओं का टोटा है। जिले के 54 आयुर्वेदिक अस्पताल को बीते पांच माह से दवाएं नहीं मिल रही हैं। ऐसे में ओपीडी में पहले जहां मरीजों को 135 तरह की दवाएं मिलती थीं वहीं वर्तमान में उन्हें 18 दवाएं ही मिल रही हैं।
उड़ैयाडीह हो या फिर चौहरजन राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में मौजूदा समय में दवाओं की कमी है। मरीजों को इलाज कराने सीएचसी-पीएचसी जाना पड़ रहा है। जिले में आयुर्वेदिक अस्पतालों में जहां पहले ओपीडी में करीब 4000 मरीजों का इलाज होता था। वही, अब इसकी संख्या घटकर 1500 हो गई है।
आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी डॉ. त्रिभुवन राम ने कहा कि शासन के पास दवा का मांग पत्र भेजा गया है। अगस्त तक दवा आ जाएगी। धीरे-धीरे दवाओं की कमी पूरी हो रही है। जो दवाएं जरूरी हैं उन्हें खरीद लिया गया है और बाकी दवाओं को भी जल्द ही खरीदा जा रहा है। एक बड़ा स्टॉक मेंटेन करके रखा जाएगा। अस्पतालों में अश्वगंधा चूर्ण, अश्वगंधारिष्ट, अशोकारिष्ट, दशमूलारिष्ट, पंचगुड़ तेल, महानारायण तेल, हिमवाष्टक चूर्ण, लवण भास्कर, आयुष चौसठ समेत कई दवाएं नहीं हैं।
कोरोना के बाद बढ़ा आयुर्वेद का रुझान
मरीज सुरेंद्र ने बताया कि कोरोना के बाद तो आयुर्वेदिक उपचार की तरफ लोगों को रुझान बढ़ा है। लेकिन, इस तरफ विभाग ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। वह उपचार के लिए आए थे, लेकिन पंचकर्म करने का सामान बाहर से लेना पड़ता है और दवाएं भी नहीं मिलीं।