प्रतापगढ़। शहर को सुंदर बनाने में जुटे प्रशासन का अतिक्रमण हटाओ अभियान शुक्रवार को मीराभवन चौराहे से अंबेडकर चौराहे तक चला। करीब चार बजे जेसीबी लेकर प्रशासनिक अमला पहुंचा तो अतिक्रमणकारियों का कलेजा दहल गया। लगातार कई दिन से चेतावनी के बाद भी सड़क की पटरी से कब्जा न हटाने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई। लकड़ी व लोहे की कई गुमटियों को तोड़ कर ट्रैक्टर से एसडीएम सदर जेपी मिश्र की मौजूदी में नगर पालिका कर्मी उठा ले गए। नेतागीरी कर रहे कुछ लोगों को अफसरों ने फटकार कर चुप करा दिया। दुकान के सामान व छप्पर हटने से सड़क पर काफी जगह बन गई।
रोडवेज बस अड्डे के पास कई लोगों ने पट चुके नाले के ऊपर पिलर बना घर का बारजा निकाल रखा है। दूसरे तल पर उस बारजे से दीवार उठवा कर कई तल्ले की इमारत खड़ी कर ली है। निचले तल पर पटरी तक अतिक्रमण कर दुकान चला रहे हैं और ऊपर परिवार रहता है।
ऐसे लोगों का नाम रजिस्टर में दर्ज कर एसडीएम ने नोटिस देने की बात कही है। स्थिति यह थी कि पिलर ढहाने पर आधा मकान नीचे चला आता। इस कार्रवाई में यह साफ देखने को मिला कि अतिक्रमणकारियों ने पटरियों और नाले की जमीन पर कब्जा करने में कोई गुरेज नहीं किया। एक छत के ऊपर प्रचार होर्डिंग का फ्रेम बना है। उसे उतरवाने के लिए नोटिस देने की चेतावनी देते हुए एसडीएम ने मकान मालिक का नाम रजिस्टर में दर्ज किया। सख्ती देख पटरी किनारे के ज्यादातर दुकानदार गुमटी लेकर भाग निकले।
इस पर कई दुकानदारों की लकड़ी व लोहे की गुमटियों को जेसीबी से तुड़वा कर नगर पालिका के ट्रैक्टर में लदवा दिया गया। सड़क की पटरी तक कुछ दुकानदारों ने छप्पर डाल कर अंदर इंटरलाकिंग व सीमेंटेंड फर्श बनवा रखा था। जेसीबी से उसे भी उखड़वा दिया गया। वर्षों से पटरी पर कब्जा करने वाले दुकानदारों का छप्पर हटा तो उनके चेहरे पर हैरानी व परेशानी का भाव तैरने लगा।
रोडवेज बस अड्डा के पास मऊआइमा इलाहाबाद निवासी रामगोविन्द त्रिपाल डाल कर पत्नी के साथ रहता था। उसी में चाय की दुकान खोल रखी थी। छोटी सी दुकान उन दोनों के जीने का सहारा थी। कार्रवाई देख हाथ जोड़ कर वह एसडीएम के सामने रो पड़ा। उस वृद्ध की आंख से ढरकते आंसू को देख एसडीएम का दिल पिघल गया। उन्होंने उसे गुमटी दिलाने का आश्वासन देते हुए खाने के लिए चावल व गेहूं की भी व्यवस्था कराई। कुछ पैसे भी दिए। हालांकि त्रिपाल उखाड़ दिया गया।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई देख कुछ लोग गुमटी में ताला मार कर लोगों की भीड़ में खड़े हो गए। जेसीबी ने जब तोड़फोड़ शुरू की तो वे बड़ी चालाकी से गुमटी हटाने का नाटक करने लगे। कभी बांस नीचे से लगा रहे थे तो कभी बगल से। काफी देर उनकी यह स्थिति देख एसडीएम को उनकी चालाकी समझ आ गई। एडीएम ने जेसीबी लगवा कर गुमटी ट्रैक्टर में लदवा दिया।