मोतियाबिंद से पीड़ित दो हजार से अधिक मरीज ऑपरेशन कराने के लिए परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। कुंडा सीएचसी में पिछले एक साल से नेत्र सर्जन का पद खाली है। इससे क्षेत्र के दो हजार से अधिक मोतियाबिंद के मरीज ऑपरेशन कराने के लिए परेशान हो रहे हैं। अव्यवस्था के चलते वहां चिकित्सक की तैनाती नहीं हो पा रही है।
जिले में प्रशासन की ओर से सिर्फ दो जगहों पर ही मोतियाबिंद के ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। पहली तो मेडिकल कॉलेज और दूसरी कुंडा सीएचसी में। इस समय मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन हो रहा है, जबकि बीते जुलाई से कुंडा सीएचसी में नेत्र सर्जन का पद खाली है, जिससे यहां ऑपरेशन नहीं हो रहा है। यहां तैनात सर्जन का एक साल पहले पड़ोसी जनपद अमेठी में तबादला हो गया था। सीएचसी का रिकार्ड बताता हैं कि प्रति वर्ष यहां करीब दो से ढाई हजार मरीजों का ऑपरेशन होता था, मगर इस बार एक भी मरीज का ऑपरेशन नहीं किया गया। ऐसे में ढाई हजार से अधिक मोतियाबिंद के मरीज ऑपरेशन कराने के लिए परेशान हैं।
सीएमओ के पास हैं तीन नेत्र सर्जन, मगर नहीं करते ऑपरेशन
मुख्य चिकित्साधिकारी के पास नेत्र सर्जन के रूप में डॉ. शौकत अली, श्याम भार्गव और राजेश कुमार उपलब्ध हैं। इनमें से श्याम भार्गव और राजेश कुमार को सीएमओ ने डिप्टी सीएमओ का प्रभार दे दिया है। ऐसे में दोनों डॉक्टरों ने ऑपरेशन करना बंद कर दिया है, जबकि शौकत अली की तैनाती रानीगंज में कर दी गई है। यहां अलग से ओटी सहित जांच मशीने न होने के कारण ऑपरेशन नहीं हो पाता।
संविदा के डॉक्टर की जगह तैनात है नेत्र विशेषज्ञ डिप्टी सीएमओ
सीएमओ ने डिप्टी सीएमओ डॉ. राजेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सीएमओ कार्यालय से हटाकर कुंडा नगर में बने अर्बन अस्पताल की जिम्मेदारी सौंपी है, जबकि अर्बन अस्पताल का संचालन एनआरएचएम के संविदा चिकित्सक करते हैं। डॉ राजेश को सजा के रूप में कुंडा सीएचसी के नेत्र सर्जन के रूप में भी तैनात किया जा सकता था। इससे लोगों का इलाज भी हो जाता और उनकी सजा भी हो जाती। सीएमओ डाॅ. जीएम शुक्ला का कहना है कि जल्द ही वहां किसी नेत्र सर्जन को नियुक्त किया जाएगा।