अभी तक शहर व भीड़भाड़ वाले इलाकों में ही मॉस्क न पहनने वालों पर पुलिस शिंकजा कस रही थी। अब शासन के आदेश पर अफसरों ने गांवों की ओर रुख कर दिया है। पुलिस के साथ ही गांव के सेक्रेटरी को गांव के लोगों पर नजर रखने का फरमान दिया गया है। बिना मास्क लगाकर घूमने वाले लोगों के साथ सख्ती से पेश आने का भी निर्देश है।
कोरोना महामारी से जारी जंग के बीच शासन ने लोगों को मास्क लगाकर बाहर निकलना जरूरी कर दिया है। अभी तक प्रशासन की नजर केवल शहर व भीड़ भाड़ वाले इलाकों में आने वाले लोगों पर ही रहती थी। शासन ने शहर से लेकर गांव के लोगों को भी घरों से बाहर निकलने के दौरान चेहरा मास्क या गमछे से ढककर निकलने का निर्देश जारी किया है। इसके लिए पुलिस के साथ ही गांव के सेक्रेटरी को भी जिम्मेदारी दी गई है। अभी तक शहर में भागदौड़ करने वाली पुलिस अब गांवों में भी पहले लोगों को आगाह करेगी।
सेक्रेटरी भी लोगों को समझाएंगे कि ग्रामीण मुंह बांधकर ही बाहर निकलें। यदि समझाने के बाद भी कोई आदेश नहीं मानता तो ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी। कोरोना महामारी से बचाव में मास्क लगाना काफी मददगार साबित होगा। शासन के आदेश के बाद सेक्रेटरी भी प्रधानों के साथ मिलकर ग्रामीणों को जागरूक कर रहे हैं। अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी सुरेंद्र प्रसाद द्विवेद्वी ने बताया कि मास्क पहनकर ही लोग बाहर निकले। शहरियों के साथ ही गांव के लोगों पर भी यह नियम लागू है। इसकी अनदेखी करने वालों पर कार्रवाई होगी।
शासन के आदेश का शहर से लेकर गांव में कितना पालन हो रहा है। यह रविवार को देखने को मिला। पुलिस व प्रशासनिक अमले के बीच बिना मास्क व चेहरा ढके लोग घूमते हैं। शहर के हर कोने में बिना मास्क लगाए लोग सड़कों पर दिखे। खरीदारी करने के लिए भी काफी संख्या में लोग बिना मास्क लगाए ही बाजार पहुंचे। जबकि बैरीकेडिंग पर पुरुष व महिला पुलिसकर्मी मुस्तैद किए गए हैं। ऐसे लोगों को रोकने में भी पुलिसकर्मी पूरी तरह से लापरवाह नजर आए।
कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए शासन ने सभी को मास्क लगाकर ही घरों से बाहर निकलने का निर्देश दिया है। परिवार के मुखिया अपने बच्चों की जिंदगी को लेकर भी लापरवाह बने हुए हैं। उनके सामने ही बच्चे बिना मास्क लगाए घरों से बाहर निकलते हैं। यह नजारा ग्रामीण अंचलों में अधिक देखने को मिलता है।