पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे पॉलिथीन का जिलेभर में बे-रोकटोक धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। जिले में हर दिन औसतन दो क्विंटल पॉलिथीन कूड़े के ढेर से निकल रहा है। जांच के दौरान केवल जिम्मेदार औपचारिकता ही निभाते हैं।
पॉलिथीन से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। पॉलिथीन खाने से जानवरों की मौत भी हो रही है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक पाॅलिथीन का इस्तेमाल निकट भविष्य में खतरे की घंटी है। शहरी इलाकों में चोक नाले-नालियों की एक बड़ी वजह भी पॉलिथीन है।
बाजारों में दुकानों संग मोहल्लों में ठेलों पर पॉलिथीन खुलेआम इस्तेमाल हो रहा है। थोक में इसकी बिक्री है। हैरत की बात यह है कि पॉलिथीन के इस्तेमाल के खतरों को लेकर आम नागरिक भी जागरूक नहीं हो रहा है। जिम्मेदार अधिकारी भी पूर्ण प्रतिबंध लगाने में नाकाम है। वहीं, ईओ राकेश कुमार कह रहे हैं पॉलिथीन बेचने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है।
पर्यावरण के साथ सेहत को भी खतरा
डॉ. अनुज चौरसिया कहते हैं पॉलिथीन का इस्तेमाल पर्यावरण व मानव सेहत के लिए खतरनाक है। कभी न नष्ट होने वाले पॉलिथीन ग्राउंड वाटर लेवल को प्रभावित कर रहे हैं। अगर पॉलिथीन खेतों में चली जाती है इससे उर्वरक शक्ति प्रभावित होती है। गर्म चाय का पॉलिथीन में सेवन करना सेहत के लिए खतरनाक है।
ड्रेनेज सिस्टम के लिए मुसीबत बना पॉलिथीन
शहरी इलाकों में चोक नाले-नालियों की वजह से जलभराव की एक बड़ी वजह पाॅलिथीन भी है। पॉलिथीन ड्रेनेज सिस्टम के लिए मुसीबत बन गया है। जबकि इसके रोकथाम की जिम्मेदारी नगर निकाय की है।
एक नजर शहर में हुई कार्रवाई पर
छह माह में पांच किग्रा पॉलिथीन जब्त
छह माह में पाॅलिथीन का प्रयोग करने वालों पर 45 हजार का जुर्माना