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किसानों को धोखा देने वाली बीमा कंपनी को दिखाया बाहर का रास्ता

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किसानों को धोखा देने वाली बीमा कंपनी को इस बार बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। अब सरकार ने स्वयं किसानों को क्लेम देने की जिम्मेदारी ली है। पांच माह से ठप योजना को एक बार फिर हरी झंडी मिली है। इससे उन किसान परिवारों को राहत मिलेगी, जिनके आश्रितों की दुर्घटना के दौरान शारीरिक रुप से अक्षम हो गए थे या जिनकी मौत हो गई थी।
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किसानों की सुरक्षा और कल्याण के लिए चलाई गई मुख्यमंत्री किसान सर्वहित बीमा योजना पर एक बार फिर कैबिनेट ने मुहर लगा दी है। इस योजना के तहत किसानों का पांच लाख रुपये का बीमा होता है और किसानों के हिस्से की प्रीमियम शासन देता है। अभी तक जिले में यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को बीमा कंपनी को किसानों के दावे निस्तारित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, मगर मानक पर खरा नहीं उतरने के चलते अब इस योजना को शासन ने अपनी देखरेख में चलाने का फैसला किया है।
जिले के 167 दावे ऐसे हैं, जो अभी बीमा कंपनी के पास लंबित हैं। सितंबर माह में करार की तिथि समाप्त होते ही योजना पर विराम लग गया था। मगर कैबिनेट की मुहर लगते ही किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। योजना के लागू होने से वह किसान भी आवेदन कर सकेंगे, जो करार समाप्त होने के बाद इंतजार कर रहे थे।
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इंतजार करने वाले किसानों को आवेदन करने का मिलेगा मौका
शासन और बीमा कंपनी के बीच हुए करार की समय सीमा समाप्त होने के बाद आवेदन करने से वंचित रहने वाले किसान अब आवेदन कर सकेंगे। मुख्य राजस्व अधिकारी को नई जिम्मेदारी दी गई है, वह नियमित रूप से समीक्षा करेंगे।
अंग-भंग होने पर मिलते हैं 1.25 लाख रुपये
खेत में काम करते समय दुर्घटना का शिकार होने और अंग-भंग होने की दशा में किसानों को 1.25 लाख रुपये मिलते हैं। जबकि किसान की मौत होने पर पांच लाख रुपये उसके आश्रितों को मिलते हैं।
किसानों के लिए कल्याणकारी योजना है, दुर्घटना के शिकार किसानों को राहत राशि देने के साथ ही मृत्यु होने पर आश्रितों को पांच लाख रुपये मिलते हैं। जो किसान अभी तक आवेदन नहीं किए थे, वह अविलंब आवेदन कर दें। शत्रोहन वैश्य, एडीएम
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