फर्जी आईडी लगाकर गैस कनेक्शन लेने वाले लोगों पर तेल कंपनियों ने शिकंजा कसने के लिए जाल फैलाया है। प्रतिवर्ष लाखों रुपये का चूना लगाने वाले इन लोगों को खोजने की जिम्मेदारी जिला पूर्ति विभाग को सौंपी गई है। कंप्यूटर पर डाटा अपलोड होने पर 1258 लोगों के फर्जीवाडे़ का खुलासा हुआ है। इन नामों से लिए गए अधिकांश सिलेंडरों की खपत होटलों और ढाबों में हो रही है।
फर्जी आईडी पर वर्षों से गैस कनेक्शन लेकर होटल और ढाबों में सिलेंडर का प्रयोग करने वाले लोगों को चिह्नित कर कार्रवाई करने की रणनीति बनाई है। गैस एजेंसियों की मिलीभगत से होने वाले इस खेल में प्रतिवर्ष लाखों रुपये राजस्व का नुकसान हो रहा था। तेल कंपनियों के रडार पर आने वाले कथित 1258 फर्र्जी कनेक्शनधारी लोगों की वास्तविक पहचान करने के लिए जिला पूर्ति विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है। तेल कंपनियों ने इस फर्जीवाडे़ का खुलासा उपभोक्ताओं का डाटा इंटरनेट पर आने के बाद किया है। तेल कंपनियों ने इन उपभोक्ताओं की सेवाओं को ठप कर फर्जीवाड़ा साबित होने पर कार्रवाई करने की बात कही है। जिला पूर्ति विभाग के कर्मचारी घर-घर जाकर इस फर्जीवाड़े की हकीकत जानने का प्रयास कर रहे हैं। तेल कंपनियों का पत्र मिलते ही जांच प्रारंभ हो गई है। एआरओ सतीश मिश्र ने बताया कि जांच के लिए कई टीमें बनाई गई हैं जो उपभोक्ताओं के घर-घर जाकर वास्तविकता की खोज करेंगी। इसी माह के अंत तक रिपोर्ट अधिकारियों को भेजी जाएगी।