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मिलीभगत से चल रहा था कछुआ तस्करी का खेल

Fri, 20 Feb 2015 11:15 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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तस्करी के लिए ट्रेन से ले जाये जा रहे कछुओं की तस्करी का खेल रेलकर्मियों और पुलिस की मिलीभगत से चल रहा था। शुक्रवार को पुलिस के खुलासे पर सवाल उठने लगे। जांच पड़ताल में पता चला है कि यात्रियों की सूझबूझ के चलते तस्करी का पर्दाफाश हुआ है। वरना करोड़ों के कछुए राज्य की सीमा से पार हो जाते।
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बतादें गुरुवार को स्थानीय जंक्शन के प्लेटफार्म दो पर कोलकाता जाने वाली पंजाब मेल के स्लीपर कोच से जीआरपी ने सैकड़ों की संख्या में कछुए पकड़े थे। इसकी तस्करी में लिप्त तीन लोगों को भी गिरफ्तार करने में पुलिस को सफलता मिली थी। भारी संख्या में कछुओं की खेप का स्टेशन के अंदर दाखिल होना पुलिस की चेकिंग शैली पर सवाल उठाता है। प्लेटफार्म पर एक साथ 16 बैग देखने के बाद भी पुलिसकमियों को उन पर शक नहीं हुआ। पार्सल कर्मियों से भी चूक हुई। बिना टिकट के स्लीपर कोच में इतने सारे लोग जिनकी वेशभूषा ठीक नहीं थी सामान लेकर घुस गए। टीटीई ने इनको चेक करने की जरूरत भी नहीं समझी। ये सारे संयोग तो एक साथ नहीं हो सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम में रेलकर्मियों के मिलीभगत की बू आ रही है।

 पंजाब मेल के एस-4 कोच में यह घटना हुई। उसी कोच में यात्रियों के बीच फौजी, पुलिस व रेलकर्मी भी बैठे थे। अमर उजाला के पास उसमें से शामिल ऐसे ही यात्री की आवाज का टेप है जिसने पूरी घटना को देखा है। शुक्रवार को स्टेशन पर एक अधिकारी के कक्ष में बैठकर उससे बातचीत हुई तो घटना का खुलासा हुआ। बातचीत के अनुसार यात्रियों के पैर से बैग टकराया तो उनको शंका हुई। महिला यात्री ट्रेन से कूद पड़ी।
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भागती हुई दूसरे कोच में जाकर बैठ गई। यात्रियों ने शोर मचाया। ट्रेन रुकने के बाद डर के मारे यात्री एस-5 में जाकर बैठ गए। इसी बीच वहां टीटीई आ गया। यात्रियों ने उससे घटना के बारे में बताया। टीटीई ने यात्रियों को बताया कि आगे के कोच में भी कछुए के बैग रखे हुए हैं। बैग से पुलिस को महिलाओं केे कपडे़ भी मिले हैं। इससे महिला के शामिल होने की पुष्टि होती है। सब कुछ जानकर भी गार्ड ने तलाशी के लिए ट्रेन नहीं रोकी। कछुए की जगह उसमें विस्फोटक सामग्री होती तो क्या गार्ड इसी तरह से ट्रेन लेकर चला जाता। इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं हैं।
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