स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की मौत से क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई। सूचना पर अफसर उनके घर पहुंचे। प्रशासन की ओर से उन्हें सलामी दी गई। वर्ष 1942 में कनकलता बरुआ ने बानर सेना का निर्माण किया था। इसकी महिला विंग में बाघराय थाना क्षेत्र के बारों गांव निवासी ब्रह्मदीन तिवारी की पुत्री धनपत देवी ने भी सक्रिय भूमिका निभाई थी। यही नहीं वह आंदोलन के दौरान 9 महीने जेल में भी रहीं। उस समय महिलाओं की भूमिका राजनीति में न के बराबर थी। बावजूद इसके धनपत देवी राजनीति में इंदिरा गांधी के साथ थीं।
इनकी शादी राजापुर में रामसुंदर पांडेय से हुई थी। रामसुंदर पांडेय की पूर्व में मौत हो चुकी है। इनके पति भी उनके साथ बारों में ही रहते थे। रविवार सुबह उनकी मौत हो गई। परिजनों ने सूचना प्रशासन के साथ ही लोगों को दी। इस पर तमाम लोग मौके पर पहुंचे। तहसील से एसडीएम प्रदीप सिंह, सीओ सदर राम जनम, एसओ बाघराय भी घर पहुंचे। अंतिम संस्कार श्रृंगवेरपुर घाट पर किया गया। इस मौके पर उन्हें सलामी भी दी गई। क्षेत्रीय लोगों ने भी उन्हें नमन किया। इस मौके पर कमलेश पांडेय, आलोक रंजन, इंद्र नारायण तिवारी, क्षीर सागर तिवारी, संतोष पांडेय, सुग्गा तिवारी, सुमन पांडेय, शिवमूर्ति तिवारी, मदन तिवारी आदि मौजूद रहे।