रहमतों का दरवाजा बंद अब बरकत का अशरा शुरू
मुकद्दस रमजान के तीन अशरों का है अलग-अलग महत्व
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। रमजान का महीना हर मुसलमान के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, जिसमें 30 दिनों तक रोजे रखे जाते हैं। रहमत के पहले अशरे का आगाज रमजान से हुआ। जो बृहस्पतिवार को समाप्त हो रहा है। मगरिब की नमाज के बाद रमजान का दूसरा अशरा बरकत का शुरू होगा।
मौलाना ताजदार अहमद ने बताया कि रमजान में पहला अशरा रहमत का होता है। इस अशरे में अल्लाहताला अपनी रहमतों की बारिश करते हैं। दूसरा अशरा बरकत का होता है। अल्लाह की रजा हासिल करने के लिए रोजेदार रोजा रखने के साथ ज्यादातर समय इबादत में गुजारते हैं। ताकि वह दीनी जिंदगी में अपने अल्लाह को राजी कर सकें। तीसरा अशरा मगफिरत का होता है। जो बीस रोजे पूरे होने के बाद शुरू होता है। हर मुसलमान पर रोजे फर्ज किए गए हैं। इसी माह में जकात और खैरात बांटने से शबाब मिलता है। रमजान में अल्लाह ने रोजे फर्ज किए हैं। जिस शख्स ने इस माह में छोटी से भी नेकी का काम किया, उसने अन्य महीनों के फर्ज के बराबर नेकी प्राप्त कर ली। यह महीना लोगों के साथ हमदर्दी व सब्र का है। तीसरे अशरे में शब-ए-कद्र की रात आती है, यह रात हजारों रातों से बेहतर होती है।
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कुरान पाक हुआ है मुकम्मल, तरावीह नहीं
सदर विकासखंड के भंगवा स्थित मस्जिद में तरावीह की नमाज के दौरान कुरान पाक मुकम्मल हुआ। कारी शाहिद ने आठवें रोजे पर तरावीह में कुरान पाक सुनाया। दुआ के पहले मौलाना शहान ने दीनी व दुनियाबी मामलों पर रोशनी डाली। लोगों से कहा कि वे अपने ईमान पर चलें। जितनी हमारे लिए दुनियावी जिंदगी जरूरी है उतनी ही दीनी भी। तरावीह की नमाज पूरे रमजान भर पढ़ा जाना है। लोग यह न सोचे कि अब तरावीह की नमाज नहीं पढ़ी जाएगी। इस मौके पर हाफिज रुकनुद्दीन, कासिम , रहमान बाबा, फकरुद्दीन, गुड्डू समेत अन्य लोग मौजूद रहे।