जागरूकता और मोटीवेशन के अभाव में सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जिले में चौपट हो गई है। नसबंदी का निर्धारित लक्ष्य स्वास्थ्य विभाग पूरा नहीं कर पा रहा है। इस काम में अधिकारी व स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही सामने आ रही है। हैरत है कि जिला प्रशासन भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
स्वास्थ्य विभाग में जागरूकता फैलाने का ढिंढोरा पीटने वाले अफसरों के दावों की पोल नसबंदी कार्यक्रम खोल रहा है। स्वास्थ्य विभाग को सरकार ने वित्तीय वर्ष 2013-2014 में नसबंदी का लक्ष्य दिया था। निर्देश था कि 1594 पुरुष और 14342 महिलाओं की नसबंदी कराई जाए। स्वास्थ्य विभाग का अमला इस लक्ष्य के मुताबिक नसबंदी नहीं करा सका। इसके प्रति लोगों में जागरूकता का अभाव तो है ही आशा बहुएं पुरुषों व महिलाओं को नसबंदी के लिए मोटिवेशन में भी सफल नहीं रहीं। अधिकारियों ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया।
इसका परिणाम यह हुआ कि बीते वित्तीय वर्ष में मात्र 46 पुरुषों और 7056 महिलाओं की ही नसबंदी हो सकी। पिछले वित्तीय वर्ष में लक्ष्य पूरा न होने के कारण विभाग को चालू वित्तीय वर्ष 2014-2015 में भी नसबंदी का वही लक्ष्य रखना पड़ा। मगर इस साल तो हालत और भी खराब है। आंकड़ों पर गौर करें तो यह वित्तीय वर्ष भी बीतने को है। और अब तक केवल 17 पुरुषों और 3739 महिलाओं की नसबंदी हो सकी है। पिछले साल के हालात को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि इस वर्ष भी नसबंदी का लक्ष्य पूरा होना मुश्किल है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीके पांडेय ने बताया कि लक्ष्य पूरा नहीं हुआ होगा। यह मान सकते हैं। मगर इतना कम है यह कैसे हो सकता है। हम महीनेवार डाटा देखने के बाद ही कुछ कह सकते हैं। मोटिवेशन में लापरवाही हो रही है तो मामले की जांच कराई जाएगी। दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।