जिले में सफेद जहर (हेरोइन, स्मैक, कोकीन और सिंथेटिक ड्रग्स) का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। अपराधियों के बुने जाल में फंसकर युवा मादक पदार्थों की बेखौफ तस्करी कर जीवन बर्बाद कर रहे हैं। भविष्य संवारने की उम्र में महंगा शौक युवाओं को सलाखों के पीछे लाकर खड़ा कर रहा है।
आसपुर देवसरा पुलिस और स्पेशल टीम की संयुक्त कार्रवाई में रविवार की रात एक करोड़ कीमत की एमडी (मेथम्फेटामाइन) सैफाबाद-मुरैनी मार्ग से बरामद हुई। गिरफ्तार होने वालों में आनंद मिश्रा (25), दिव्यांशु दुबे उर्फ गब्बर (24), आलोक शुक्ला (24), संदीप दुबे उर्फ दीपेश (25) और मंजीत (21) शामिल हैं।
युवाओं का अपराध के दलदल में लाने वाला मुख्य आरोपी लवी दिल्ली की जेल में बंद है। हाल ही में पुलिस और एसओजी टीम ने पट्टी इलाके से पांच करोड़ रुपये कीमत की एमडी बरामद कर दो आरोपियों आशीष मिश्रा और शिवम मिश्रा को सलाखों के पीछे भेज दिया। छह माह के अंदर पुलिस सात युवाओं पर कार्रवाई कर चुकी है।
युवाओं को काउंसलिंग की जरूरत
कॉलेजों के पाठ्यक्रम में नशा मुक्ति से जुड़े विषयों को शामिल करना चाहिए ताकि युवाओं को शुरुआत से ही इसके दुष्प्रभावों की जानकारी हो सके। समय-समय पर युवाओं की काउंसलिंग भी जरूरी होती है। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद कॉलेज पहुंचने वाले युवाओं को अधिक जागरूक करने की जरूरत है।
प्रो. दिनेश कुमार, विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान, पीबीपीजी कॉलेज सिटी
ऑपरेशन प्रहार के तहत तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों की काउंसलिंग की जाती है। खासकर युवाओं की ताकि यह जानकारी हो सके कि किस कारण से उन्होंने अपराध के क्षेत्र में कदम रखा।
दीपक भूकर, एसपी