लॉकडाउन के दौरान लौटे प्रवासियों को रोजगार देने में प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल कर वाहवाही लूटने वाले अफसरों पर अब जांच की तलवार लटक रही है। भुगतान से पहले होने वाली जांच से खलबली मची है।
जांच में ग्राम पंचायतों में हुआ फर्जीवाड़ा सामने आ सकता है। शासन ने 22 अक्तूबर से पहले जांच पूरी कर भुगतान करने को कहा है। अफसरों को जांच के बाद भुगतान की संस्तुति करनी है।
लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों को रोजगार देने के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 20 जून से 30 अगस्त तक जिले को 35 लाख मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य मिला था। जिले के अफसरों ने ग्राम प्रधानों और वीडीओ पर दबाव डालकर लक्ष्य से अधिक जिले में 35,13,458 मानव दिवस सृजित करके प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल कर लिया।
अब भुगतान को लेकर शासन ने जांच का निर्देश दिया है। इसके लिए 22 अक्तूबर की तिथि निश्चित की गई है। लॉकडाउन में कितने कार्य हुए थे, अब उनका हिसाब मांगा जा रहा है। इधर, अफसरों का दावा है कि लॉकडाउन में जो कार्य हुए थे, उनका सत्यापन हो चुका है। जहां कहीं भी संदेह है, वहां गहराई से जांच करा ली जाएगी। फिलहाल जिले में जांच के नाम पर खलबली मची हुई है। प्रधान और सचिव ब्लाकों में जमे रहकर अपना अभिलेख तैयार करने में लगे हैं। शनिवार को महीने का दूसरा शनिवार होने के बाद भी सदर ब्लाक और विकास भवन गुलजार रहा और अफसर फाइलें पलटते रहे।
ग्राम पंचायतों में अब नहीं मिलेगा साक्ष्य
लॉकडाउन के दौरान पक्के कार्यों पर रोक लगाकर कच्चे कार्य कराने के निर्देश दिए गए थे। अधिकांश ग्राम पंचायतों ने सिर्फ दो ही काम कराए। संपर्क मार्ग का निर्माण और मरम्मत दूसरा तालाबों की खुदाई। इन दोनों कार्यों का साक्ष्य अब मिलना मुश्किल है। जिन तालाबों की खुदाई हुई थी, उनमें अभी पानी भरा हुआ है। जिनमें पानी नहीं है, वहां बरसात के पानी के साथ सिल्ट जमा हो गई है। उधर, बरसात में संपर्क मार्ग भी कहीं बह गए हैं तो कहीं खराब हो गए हैं।
काम नहीं करने वाले मजदूरों के खाते में भेजे रुपये
लाकडाउन के दौरान मनरेगा में कार्य नहीं करने वाले मजदूरों के खाते में रुपये भेज दिए गए। हालांकि बाद में किसी तरह रिकवरी हुई। अधिकांश प्रधानों ने फ्रेंचाइची से संपर्क कर सिर्फ अगूंठा ही लगवाया और रुपये अपनी जेब में रख लिए। आश्चर्य की बात तो यह थी कोविड के संक्रमण को देखते हुए कोई अफसर गांव में जांच करने भी नहीं गया।
जिले को 35 लाख मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य था। इससे अधिक लोगों को रोजगार मिला। 22 अक्तूबर तक अभियान चलाकर भुगतान करना है। अधिकांश ग्राम पंचायतों में सत्यापन हो चुका है। जहां कहीं भी संदेह है, उसकी जांच कराकर अविलंब भुगतान कर दिया जाएगा।
अजय कुमार पांडेय, डीसी मनरेगा