सई नदी का पानी अब घटने लगा है। हर दो घंटे पर सई नदी का पानी एक सेंटीमीटर घट रहा है। इससे पानी से घिरे तटीय इलाके के लोगों ने राहत की सांस ली है। हालांकि अभी भी नदी किनारे के घरों में पानी भरा है।
जिले में उफनाई सई नदी लाल निशान के करीब पहुंच गई थी। पानी तटीय क्षेत्र में बने मकानों, कालेजों में प्रवेश कर गया। लोग अपना घर छोड़कर ठिकाना बदलने के लिए मजबूर हो गए। बेल्हा देवी के करीब सदर बाजार में तटीय इलाके में बने मकानों को लोगों ने खाली कर दिया था। मंगलवार से सई नदी का उफान थम गया।
हर दो घंटे पर नदी का पानी एक सेंटीमीटर नीचे खिसक रहा है। नदी के पानी से घिरे लोगों ने अपना मकान छोड़ दिया। सई नदी का पानी नीचे खिसकने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली। अभी तक करौंदीघाट, सरायवीरभद्र, भुलियापुर, कादीपुर, पटखौली, शिवसत व महुआर के लोगों के साथ ही जामताली इलाके में लोग नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से चिंतित थे। सई नदी के उफान के चलते बकुलाही, चमरौधा समेत दूसरी नदियां भी उफान पर थीं। जिसके चलते लोगों को समस्या का सामना करना पड़ रहा था।
दीवार के मलबे में दबने से वृद्ध की मौत
कच्चे मकान की दीवार के मलबे में दबकर वृद्ध की मौत हो गई। मानधाता थाना क्षेत्र के पुरैला निवासी मकबूल नाई (65) मंगलवार को अपने घर के भीतर बैठे थे। अचानक उनका मकान भरभराकर गिर गया। जिसके मलबे में मकबूल दब गया। शोरशराबा सुनकर आसपास के लोग दौड़ पड़े।
लोगों ने मलबे में दबे मकबूल को बाहर निकाला। अस्पताल ले जाने से पहले ही उसकी सांसें थम गईं। घटना के समय घर में कोई मौजूद नहीं था। मकबूल की मौत से कोहराम मचा रहा।
नहीं मिला आवास, दूसरों के घर में ली पनाह
लक्ष्मणपुर विकासखंड के देवापुर सकली के बुजुर्ग विजय प्रसाद पांडेय के पास रहने का आशियाना नहीं है। कई बार प्रधानमंत्री आवास के लिए प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। बरसात में विजय का कच्चा मकान गिर गया। जिसके बाद वह पत्नी सीता देवी के साथ कभी खुले में तो कभी पड़ोसी के घर में रहने को मजबूर है।
बेल्हा देवी धाम परिसर में भरा सई नदी के बाढ़ का पानी।- फोटो : PRATAPGARH