पूर्वजों के उद्धार के लिए कुंभ में बेल्हा की दस हजार बछिया दान की जाएंगी। इसके लिए पंडों ने जिले के पशु व्यापारियों के साथ ही आम लोगों से भी संपर्क साधा है। कुंभ के मौके को भुनाने के लिए पशु व्यापारी जिले में देशी बछिया ढूंढ रहे हैं।
हिंदू धर्म में गो दान का बड़ा महात्म्य है। वह भी गंगा नदी के किनारे। घाट पर स्नान के बाद तट पर बैठे पंडा वैदिक मंत्रों के बीच श्रद्धालुओं से गो दान कराते हैं। माघ महीने में प्रयागराज में संगम की रेती में आयोजित होने वाले कुंभ मेले में गो दान करने वालों की बड़ी संख्या होती है। इससे पंडा व पुरोहितों की जमकर कमाई होती है। इस बार के कुंभ में कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। जानकारों की मानें तो ऐसे संयोग में गो दान का महत्व बढ़ गया है।
इस मौके को भुनाने के लिए भारी तादाद में पंडा व पुरोहित प्रयागराज के साथ ही आसपास के जनपदों में भी बछिया तलाश रहे हैं। प्रयागराज के पंडों व पुरोहितों ने जिले के पशु व्यापारियों से भी संपर्क साधा है। पशु व्यापारी भी घर-घर जाकर बछिया के बारे में पता कर रहे हैं। कुंडा, लालगंज, सदर, पट्टी व कुंडा तहसील मिलाकर अब तक करीब 10 हजार बछिया के लिए बातचीत तय हो गई है। इन्हें प्रयागराज भेजा जा रहा है।
रानीगंज तहसील क्षेत्र से ही एक हजार से अधिक बछिया भेजी जा चुकी हैं। क्षेत्र के पशु व्यापारी नन्हें मठिया ने बताया कि 200 गाय व बछियों को कुंभ मेला पहुंचा चुका हूं। सिद़्दीक संडिया ने बताया कि अब तक 300 बछिया अभी तक कुंभ में भेजी जा चुकी हैं। अभी भी डिमांड की जा रही है। पशु व्यापारी फुल्लन गंभीरपुर ने बताया कि अब तक 400 गाय व बछियों को प्रयाग पहुंचाया गया है।
देशी बछिया की मांग अधिक, पशुपालकों ने बढ़ा दी कीमत
गो दान के लिए सबसे अधिक मांग देशी व साहीवाल बछिया की होती है। जानकार बताते हैं कि इनकी मान्यता अधिक है। पशु व्यापारी घर-घर भ्रमण कर ऐसी ही गायों एवं बछियों को खरीद रहे हैं। डिमंाड को देख पशुपालकों ने इनके दाम बढ़ा दिए हैं।
पशु व्यापारी कर रहे अच्छे कमाई
देशी व शाहीवाल बछिया के व्यवसाय में जिले के पशु व्यापारी अच्छी कमाई कर रहे हैं। व्यापारियों की मानें तो वह पशुपालकों से दो से ढाई हजार रुपये में बछिया खरीदते हैं, जबकि इसे प्रयागराज में 4 से 5 हजार रुपये में बेचते हैं।
क्या है गो दान का महात्म्य
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देह त्यागने के उपरांत जीव को अपने कर्मों के अनुसार दंड भुगतना पड़ता है। इस दौरान वैतरणी नदी को भी पार करना होता है, जिसमें गाय बहुत ही सहायक होती है। बताया जाता है कि गो दान करने से जीव को वैतरणी पार करते समय दिक्कत नहीं होती है। गो माता जीव को वैतरणी पार लगाती हैं। इसके अलावा पूर्वर्जों का भी उद्धार करती हैं। पंडित आलोक मिश्र ने बताया कि गंगा के किनारे गो दान का अलग ही महत्व है। वस्त्र दान, रुपया दान, नेत्र दान सहित तरह-तरह के दान व्यक्ति जीवन में समय-समय ापर करता है। दान को लेकर आध्यात्मिक एवं धार्मिक मान्यताएं भी हैं।