बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी अध्यापक बनकर विभाग को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वालों के बचाव में खंड शिक्षा अधिकारी आ गए हैं। डीएम के निर्देश पर खंड शिक्षा अधिकारियों को मुकदमा दर्ज कराने को कहा गया था, मगर 19 दिन बीतने के बाद भी 19 फर्जी अध्यापकों के खिलाफ मुकदमा नहीं दर्ज हुआ है।
बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षामित्रों के दूसरे चरण का समायोजन 01 मई 2015 को किया गया था। विभागीय अफसरों और कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते 19 ऐसे लोगों को सहायक अध्यापक पद पर तैनाती दे दी गई, जो किसी विद्यालय में शिक्षामित्र ही नहीं थे। इसका खुलासा 25 जुलाई 2017 को उस समय हुआ, जब सुप्रीमकोर्ट ने शिक्षामित्रों के समायोजन को निरस्त कर दिया। विभागीय जांच में 19 अध्यापकों के फर्जी मिलने के बाद भी अधिकारी कार्रवाई करने को तैयार नहीं थे। डीएम शंभु कुमार ने पहल करते हुए फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने को कहा।
बीएसए ने खंड शिक्षा अधिकारियों को तुरंत मुकदमा दर्ज कराने को कहा, लेकिन 19 दिन का समय बीतने के बाद भी फर्जीवाड़े में शामिल लोगों के खिलाफ मुकदमा नहीं दर्ज किया गया है। दरअसल, मुकदमा दर्ज कराने का मामला खंड शिक्षा अधिकारियों को मिलते स्थानीय नेता हावी हो गए और वह तरह-तरह की धमकी देने लगे। इससे घबराकर खंड शिक्षा अधिकारियों ने थाने में तहरीर ही नहीं दी। बीएसए के पूछने पर वह विभागीय कार्य में व्यस्त होने का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेते हैं। मुकदमा दर्ज कराने के लिए बीएसए ने 19 दिन पहले आदेश किया था, मगर अभी तक एक भी आरोपी के खिलाफ मुकदमा नहीं हुआ है।
नेताओं के घर डाला डेरा
फर्जीवाड़े में शामिल अधिकांश लोग जिले के निवासी हैं। इससे वह कार्रवाई से बचने के लिए स्थानीय नेताओं के घर डेरा डाले हुए हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कभी नेता घर बुलाकर तो कभी फोन पर मुकदमा न दर्ज करने की चेतावनी दे रहे हैं।
बीईओ के पास नहीं है कोई बहाना
मुकदमा दर्ज कराने में दिलचस्पी नहीं दिखाने वाले खंड शिक्षा अधिकारियों के पास कोई बहाना नहीं रह गया है। जांच पूरी होने के बाद मुकदमा दर्ज कराने को कहा गया है, इसलिए उनके पास कोई बहाना नहीं बचा है, जब उनसे पूछा जाता है तो कहते हैं कि थाने गया था, कोतवाल नहीं थे।
फर्जीवाडे़ में शामिल 19 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का आदेश खंड शिक्षा अधिकारियों को दिया गया है। विभागीय कार्यों की व्यस्तता बताकर अभी तक मुकदमा नहीं दर्ज कराया गया है। चेतावनी पत्र दिया गया है कि अगर संबंधित थाने में मुकदमा नहीं दर्ज कराते हैं तो बीईओ के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अशोक कुमार सिंह, बीएसए।