प्राइवेट अस्पतालों में लगातार प्रसूता व नवजातों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की हो रही किरकिरी से नाराज सीएमओ डा. जीएम शुक्ला एक्शन में दिखे। प्राइवेट अस्पतालों की जांच के लिए दो टीम गठित कर छानबीन कराई। खुद सरकारी अस्पतालों का निरीक्षण करने निकले। बिना मानक के संचालित अस्पताल संचालक कमियां छिपाने में जुटे रहे।
कुंडा, लालगंज के बाद शहर के प्राइवेट अस्पताल में प्रसूता की मौत के बाद सीएमओ ने मां अस्पताल का निरीक्षण कर कमियां मिलने के बाद सील करा दिया। निजी अस्पतालों का निरीक्षण करने के लिए डिप्टी सीएमओ एस हैदर, अपर शोध अधिकारी आरजी चौधरी, एसीएमओ आरएस राम, स्वास्थ्य शिक्षाधिकारी आरपी सिंह, मलेरिया इंस्पेक्टर केपी द्विवेदी की दो टीम गठित की।
सोमवार को दोनों टीम निजी अस्पतालों की जांच करने निकली। मीराभवन स्थित वैशाली और तनुश्री हॉस्पिटल में बगैर चिकित्सक के अनट्रेंड कर्मचारी प्रसव कराते मिले। एसीएमओ ने प्रसव पीड़िता को महिला अस्पताल भेजने के साथ वैशाली हॉस्पिटल और तनू श्री को सील कराया।
वहीं डिप्टी सीएमओ एस हैदर की टीम अजीत नगर स्थित ज्योति नर्सिंग होम और उसी भवन में संचालित आरके हड्डी हॉस्पिटल में जांच करने पहुंचे, जहां चिकित्सक तो दूर पैरामेडिकल स्टाफ तक नहीं मिले। अनट्रेंड लोगों के भरोसे दोनों अस्पताल संचालित हो रहे थे। डिप्टी सीएमओ एस हैदर ने दोनों अस्पताल संचालकों को नोटिस थमाते हुए जवाब मांगा। तीन दिन के भीतर जवाब न मिलने पर लाइसेंस निरस्त की चेतावनी दी।
वहीं दूसरी ओर सीएमओ खुद बाबा बेलखरनाथ धाम सीएचसी पहुंचे। निरीक्षण के दौरान सीएमओ को डॉक्टर सुंधाशु पांडेय, फार्मासिस्ट उमेश मौर्य, लैब टेक्नीशियन राकेश सिंह, फिजियोथिरेपिस्ट अखिलेश त्रिपाठी, आरबीएस केके गायब मिले। सीएमओ ने बताया कि तीन स्वास्थ्यकर्मी का वेतन रोका गया है। तीन को समय पर अस्पताल आने की चेतावनी दी गई।
डॉक्टर की डिग्री लगाकर अधिकांश संचालक अस्पताल का लाइसेंस बनवाकर मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई चल रही है। मलेरिया अधिकारी व स्वास्थ्य शिक्षाधिकारी के साथ काम करने वाले दो कर्मचारियों को जांच से अलग कर दिया गया है। डॉक्टर जीएम शुक्ला, सीएमओ।