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मजाक बना रखा है, धर्मशाला भी लेता है साक्ष्य

Sat, 11 Aug 2018 11:59 PM IST
प्रतापगढ़ ब्यूरो
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निराश्रित महिलाओं के लिए संचालित महिला स्वाधार आश्रय गृह के कारनामों को संज्ञान में लेेने के बाद शनिवार को जांच करने के लिए महिला आयोग की सदस्य अनीता सिंह पहुंचीं। उन्होंने दोनों आश्रय गृहों का निरीक्षण कर हकीकत खंगाली। कहा कि मजाक बना रखा है, धर्मशाला भी रुकने के लिए साक्ष्य लेता है। संबंधित अफसरों ने आश्रय गृह पर कितनी बार विजिट किया। इसकी भी जांच होगी। ताकि अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी सामने आ सके।
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महिला आयोग की सदस्य अनीता सिंह सबसे पहले अष्टभुजानगर स्थित जागृति स्वाधार महिला आश्रय गृह का जायजा लेने पहुंचीं। वहां केवल लेखाकार अलका पांडेय व आश्रय में रुकने वाली महिला मंजू उर्फ रजिया ही मिली। साथ मौजूद एसडीएम सदर एसपी सिंह से जानकारी लेने के बाद लेखाकार अलका पांडेय से आश्रय के संचालन के बारे में वेतन, खर्च समेत अन्य जानकारी लेने लगीं। रजिस्टर पर केवल नाम लिखने की बात सामने आने पर वह भड़क गईं। बोलीं कि सिर्फ नाम ही लिखा जाता था। निराश्रित महिलाओं की न कोई तस्वीर ली गई है और न ही उनके आने-जाने के बारे में कोई जानकारी है। यह संस्था का काम है, कोई मजाक तो हो नहीं रहा। आज धर्मशाले में भी लोग साक्ष्य लेने के बाद रुकने की अनुमति देते हैं। बाद में सभी को बाहर निकालकर अकेले में लेखाकार अलका पांडेय का बयान लिया। इसके बाद वह अचलपुर पहुंचीं। यहां भी काउंसलर साजिदा सब्बाग से पूछताछ की। केवल एक महिला ही आश्रय गृह में मिलीं। अन्य महिलाओं को उनके परिवार के लोगों के हवाले करने की जानकारी एसडीएम सदर ने दी। इस आश्रय गृह में भी मनमानी देख वह भड़क उठीं। कहा कि कौन सी महिला आ रही है और कौन कहां जा रही है। आश्रय छोड़ने वाली महिलाएं कहां चली गईं। इसका पता कैसे चलेगा। तमाम सवालों को पूछने के बाद महिलाओें के रुकने का कमरा देखा। महिलाओं के हस्ताक्षर और निरीक्षण वाले सात रजिस्टर व डायरी कब्जे में लेकर प्रोबेशन अधिकारी को सौंपा। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला फर्जीवाड़े का ही लग रहा है। महिलाओं के काल्पनिक नाम रजिस्टर में भरकर सरकार से अनुदान लिया जाता रहा। वह इस बात की भी जांच करेंगी कि आश्रय गृह का पहले अधिकारियों ने निरीक्षण किया था कि नहीं। यदि किया था तो क्या रिपोर्ट लिखी है।

आश्रय गृह से गायब मिलीं सीडीपीओ
अचलपुर स्थित आश्रय गृह पर महिला पुलिस के साथ ही बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की सीडीपीओ को तैनात किया गया था। वहां पर देवसरा की सीडीपीओ माधुरी को तैनात किया गया था। वह महिला आयोग की सदस्य के पहुंचने पर गायब थीं। उनके स्थान पर सुपरवाइजर राजकुमारी मौर्य मौजूद मिलीं। हालांकि कुछ देर बाद वह भागकर पहुंचीं।
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जांच में मदद करो, सच बताओ
अचलपुर स्थित आश्रय केंद्र का निरीक्षण करने पहुंचीं महिला आयोग की सदस्य अनीता सिंह काउंसलर साजिदा सब्बाग को पहले दुलारा। कहा कि जांच में मदद करो। सब जानकारी है, सच बताओ ताकि तुम्हारी मदद की जा सके। उसने बताया कि उसकी ससुराल जौनपुर में है। पांच साल की बेटी थी, तब से पति ने उसे ठुकरा दिया। यहीं उसे शरण मिली थी। वह आश्रय गृह का काम कर अपनी बेटी की परवरिश कर रही थी। अब उसके सामने समस्या खड़ी हो गई है। हालांकि पड़ोस के एक परिचित उसकी मदद के लिए आगे आए हैं।

सुरक्षा के बारे में भी पूछताछ
महिला आयोग की सदस्य अनीता सिंह ने दोनों आश्रय गृह केंद्रों पर मिली लेखाकार और काउंसलर से लंबी पूछताछ की। कहा कि खुद व दूसरी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कभी हकीकत जानने की कोशिश नहीं की गई। लेखाकार अलका पांडेय ने बताया कि वह अपने पति के साथ संचालिका रमा मिश्रा से कुंडा में 6 साल पहले मिली थी। बेरोजगारी के कारण वह उसे काम पर बुला लीं। हर माह आछ हजार रुपये देने की बात हुई थी। हर माह 4-5 हजार रुपये मिल जाते थे। दूसरे कर्मचारियों की बाबत संचालिका को ही जानकारी है।

संचालिका ने रजिया से बना दिया मंजू
अष्टभुजानगर स्थित जागृति महिला आश्रय गृह पर मौजूद मिलीं मंजू उर्फ रजिया ने बताया कि उसका मायका हंडौर में है। पहले उसकी शादी मुसलिम युवक के साथ हुई थी। उसने जब छोड़ दिया तो परिचित ने उसे संचालिका रमा मिश्रा के स्कूल में काम करने के लिए लगा दिया। जहां कुछ दिनों काम करने के बाद रमा मिश्रा ने रजिया से नाम बदलकर मंजूर कर दिया और उसकी शादी सरायखांडेराय के रहने वाले हरिकेश यादव से करा दिया। तब से वह यहां रहती है और साफ-सफाई का काम करती है। बेटी उसके साथ है और बेटा पति हरिकेश के साथ। अब वह अपने पति के घर जाएगी।
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