गांधी जयंती पर जिले के अधिकारी गांव-गांव स्वच्छता की अलख जगा रहे थे। कहीं गांव को ओडीएफ घोषित किया जा रहा था तो कहीं संकल्प से अभियान को साकार करने की शपथ दिलाई जा रही थी, लेकिन साहबानों को खुद के बंगले के आसपास जमा गंदगी पर नजर डालने की फुर्सत नहीं मिली। सोमवार को गांधी जयंती पर ‘अमर उजाला’ ने बेल्हा में तैनात लगभग सभी विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के आवास एवं कलोनियों का जायजा लिया तो स्वच्छता अभियान की तस्वीर धुंधली नजर आई। कहीं अफसरों के आवास के सामने कूड़े के ढेर थे तो कहीं नालियां बजबजाती मिलीं। इतना ही नहीं कहीं-कहीं तो कूड़ेदान में कूडा डंप होने के बजाए आसपास बिखरा नजर आया।
शहर के दहिलामऊ में स्थित मुख्य विकास अधिकारी का आवास है। आवास के ठीक सामने से जलनिकासी के लिए नाली है। नाली गंदगी से बजबजा रही थी। गंदगी नाली के ऊपर से बह रही थी। इसके अलावा कूड़ा करकट भी बिखरा हुआ था। यहां सीडीओ आवास के अलावा भी एक कतार से अच्छे भवन बने हुए हैं। बताया गया कि यहां सीडीओ के अलावा भी कई रसूखदार लोग रहते हैं।
शहर के दहिलामऊ में ट्रांजिट हास्टल है। यहां प्रशासनिक अधिकारी निवास करते हैं। यहां कतारबद्ध अधिकारियों के आवास हैं, मगर यहां भी सफाई नहीं दिखी। हर तरफ कूड़ा व झाड़ियां ही नजर आईं। डस्टबिन में पड़े होने की जगह कूड़ा आसपास बिखरा हुआ था। अफसरों के आवास के सामने बड़ी-बड़ी झाडियां मिलीं।
डीएम आवास के समीप ही डीएफओ का आवास है। यहां दो अक्तूबर के मद्देनजर सड़क को साफ-सुथरा कर चूने का छिड़काव किया गया था। हालांकि आवास के ठीक सामने ही कूड़ा बिखरा पड़ा था। आवारा पशुओं ने कूड़े को फैला दिया था। ठीक इसी तरह पीडब्ल्यूडी कार्यालय के सामने भी नाली बजबजाती मिली।
शहर के दहिलामऊ में ऑफिसर्स कालोनी है। यहां ए ग्रेड के कर्मचारी रहते हैं मगर यहां भी साफ-सफाई की तस्वीर बेहद दयनीय है। जगह-जगह गंदगी व कूड़ा-करकट बिखरा रहा। दोपहर करीब ढाई बजे यहां जब टीम पहुंची लोगों के आवास का दरवाजा बंद था। कालोनी में सन्नाटा पसरा रहा। साफ-सफाई के बजाए बदइंतजमी का आलम दिखा।