बीएसए कार्यालय के बगल का संविलियन विद्यालय पांडेय का पुरवा पूरी तरह से जर्जर है। विद्यालय में लगे खेल उपकरण भी टूट चुके हैं। पठन-पाठन का कार्य मुश्किलों से होता है। बारिश के दिनों में विद्यालय के कमरों की छतों से जब पानी टपकता है तो बच्चों को घर भेजना पड़ जाता है।
वर्ष 1975 में संविलयिन विद्यालय पांडेय का पुरवा का निर्माण कराया गया था। मौजूदा समय में 109 बच्चे पंजीकृत हैं, तीन शिक्षक और रसोइया के लिए एक शौचालय उपयोग में है। विद्यालय में एक शिक्षक और प्रधानाध्यापक का पद पांच वर्षों से रिक्त है।
पांच साल पहले तक आठ कमरों में पढ़ाई होती थी। मरम्मत के अभाव में विद्यालय पूरी तरह से बदहाल हो गया है। पांच कमरे जर्जर होने के कारण स्टोर रूम बना दिए गए हैं। डेस्क बेंच के साथ किताबों का भंडारण जर्जर कमरों में किया जा रहा है। जिन कमरों में बच्चे बैठते हैं, उसकी स्थिति भी ठीक नहीं है।
कभी भी कमरे का छज्जा टूटकर गिरने से हादसा हो सकता है। शिक्षकों ने बताया कि कई बार विद्यालय के जीर्णोद्धार के लिए पत्र लिखा गया। अधिकारियों ने जांच की और कागजी कोरम पूरा कर वापस लौट गए। आगे कुछ नहीं हुआ। बीएसए भूपेंद्र सिंह ने बताया कि जर्जर विद्यालयों को चिह्नित कर जीर्णोद्धार कराया जाएगा।
रसोई घर बन जाता है तालाब
विद्यालय में बना रसोई घर भी पूरी तरह से जर्जर है। छत का प्लास्टर टूट चुका है। बारिश के दिनों में पानी भर जाने से रसोईं घर में रखी भोजन सामग्री नष्ट हो जाती है। बारिश बंद होने के बाद कमरे से पानी निकालकर मध्याह्न भोजन तैयार किया जाता है। विद्यालय में बना दो शौचालय कंडम हो चुका है।