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मौखिक परीक्षा में वसूली पर परीक्षार्थियों का हंगामा

Sun, 27 Mar 2016 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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सरयू देवी महाविद्यालय महोखरी में रविवार को बीकॉम तृतीय वर्ष की मौखिक परीक्षा में वसूली का आरोप लगाते हुए अभिभावकों व परीक्षार्थियों ने जमकर हंगामा किया। वहीं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने महाविद्यालय प्रशासन पर फर्जी प्रवेश पत्र जारी करने का आरोप लगाया है। बीकॉम की मौखिक परीक्षा में शामिल होने के लिए सैकड़ों परीक्षार्थी रविवार को महाविद्यालय पहुंचे। आरोप है कि प्रति छात्र-छात्राओं के हिसाब से एक हजार रुपये सुविधा शुल्क वसूला गया था। जबकि कुछ परीक्षार्थियों ने इस शुल्क को देने पर ऐतराज जताया था। रविवार को परीक्षा के दिन उन परीक्षार्थियों को परीक्षा देने से शिक्षक रोकने लगे, जिन्होंने सुविधा शुल्क नहीं दिया था।
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इसकी जानकारी होने के बाद अभिभावक व स्थानीय लोगों की भीड़ महाविद्यालय परिसर में जमा हो गई। लोगों ने इस बात पर आपत्ति जताते हुए जमकर हंगामा किया। हंगामा करते देख शिक्षक वहां से भाग निकले। घंटो चले हंगामे के बाद महाविद्यालय प्रशासन ने अभिभावकों को शांत कराया। साथ ही सभी परीक्षार्थियों को परीक्षा देने के लिए कहा। उसके बाद बाहर से आए परीक्षकों की उपस्थिति में परीक्षा संपन्न हुई। उधर, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का आरोप है कि महाविद्यालय प्रशासन ने सैन्य विज्ञान के छात्र-छात्राओं को फर्जी प्रवेश पत्र जारी किया है। जिससे उनका शैक्षिक भविष्य अंधकारमय बना हुआ है। दरअसल, बीए व बीएससी प्रथम वर्ष के अधिकांश छात्र-छात्राओं ने सैन्य विज्ञान विषय के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था।

बीए के परीक्षार्थियों का प्रवेश पत्र विश्वविद्यालय ने जारी किया लेकिन बीएससी के परीक्षार्थियों को प्रवेश पत्र महाविद्यालय प्रशासन ने अपनी तरफ से जारी किया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अंशुल विद्यार्थी का आरोप है कि जब उन्होंने महाविद्यालय प्रशासन से बात की तो बताया गया कि साइंस फैकल्टी के परीक्षार्थियों का प्रवेश पत्र रोक दिया गया है, क्योंकि कुलपति ने साइंस व आर्ट स्ट्रीम से पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का अलग-अलग मान्यता लेने की बात कही थी, लेकिन सिर्फ आर्ट स्ट्रीम के छात्र-छात्राओं की मान्यता ली गई है। उनका कहना है कि ऐसे में किस आधार पर महाविद्यालय प्रशासन ने बीएससी के परीक्षार्थियों का प्रवेश पत्र जारी किया है। इस बारे में महाविद्यालय प्रशासन सिर्फ जांच कर कार्रवाई करने की बात कह रहा है।
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कैसे मिल गई बीकॉम की मान्यता
बीकॉम की मौखिकी परीक्षा देने आए परीक्षार्थियों का आरोप है कि सात वर्ष से महाविद्यालय में बीकॉम फैकल्टी चल रही है, लेकिन यहां पर अभी तक एक भी योग्य शिक्षक नहीं है। ऐसे में हर वर्ष आंतरिक परीक्षा का मूल्यांकन भी दूसरे महाविद्यालय के शिक्षकों द्वारा कराया जाता है। जबकि योग्य शिक्षक की मौजूदगी में आंतरिक मूल्यांकन महाविद्यालय के शिक्षक ही करते हैं। अभिभावकों ने इस बात पर आपत्ति जताई है कि योग्य शिक्षकों के अभाव के बावजूद महाविद्यालय को बीकॉम फैकल्टी की मान्यता विश्वविद्यालय ने कैसे दे दी। उन्होंने मामले की शिकायत कुलपति से करने की बात कही है।
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