राज्य कर्मचारियों, ट्रेड यूनियनों ने मंगलवार को जिले में हड़ताल की घोषणा कर कामकाज ठप रखा। दो दिवसीय कार्य बहिष्कार मंगलवार को सफल रहा। बैंक, बीएसएनएल, एलआईसी, बिजली विभाग सहित सभी सरकारी कार्यालयों में ताला लटकता रहा। राज्य कर्मचारी महासंघ ने विकास भवन में तालाबंदी कर केंद्र सरकार के खिलाफ भड़ास निकाली। वहीं राज्य कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाली के साथ संविदा कर्मियों को 18,000 रुपये और सरकारी कर्मचारियों को 26,000 रुपये मासिक वेतन भुगतान करने की मांग कर रहे थे।
जिले में मंगलवार को सभी सरकारी कार्यालयों, बैंकों, एलआईसी दफ्तर आदि में ताला लटकता रहा। राज्य कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारियों ने जुलूस निकाला और कार्यालयों में तालाबंदी की। बैंक, एलआईसी, बीएसएनएल, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, महिला एवं बाल विकास, कृषि, उद्यान, स्वास्थ्य, शिक्षा विभाग में दस्तक देकर कार्यालयों में बैठे कर्मचारियों को बाहर निकाला। विकास भवन में तालाबंदी कर मुख्य प्रवेश द्वार पर धरना प्रदर्शन कर आंगनबाड़ी, आशा, पीआरडी, मनरेगा, रसोइयां और दाई के साथ ही राज्य कर्मचारियों आदि ने केंद्र और राज्य सरकार पर भड़ास निकाली।
राज्य कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष मिथलेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुए धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए जिला मंत्री वकील अहमद ने कहा कि पुरानी पेंशन कर्मचारियों का हक है और उसे लेकर ही रहेंगे। उन्होंने संविदा कर्मियों के लिए 18,000 रुपये और सरकारी कर्मचारियों को 26,000 रुपये प्रतिमाह वेतन भुगतान करने की मांग की है। उन्होंने आउट सोर्सिंग को खत्म करने की मांग की है। इस मौके पर राम प्रकाश दूबे, परमराज गौतम, तीर्थराज गौतम, सुनीता मौर्य, माधुरी सिंह, शीला त्रिपाठी, आशा सिंह, कुसुम गुप्ता, ऐनुल हसन, गुलाब पटेल, परमानंद यादव, सुरजीत बहादुर, राजेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
बैंकों में ताला बंदकर बुलंद की आवाज
आल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सच्चिदानंद पांडेय, बिजली कर्मचारी संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष राजकुुमार, राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष वीपी त्रिपाठी की अगुवाई में हड़ताल सफल रही। धरने को संबोधित करते हुए हेमंत नंदन ओझा ने कहा कि केंद्र सरकार श्रम कानूनों में बदलाव करके मजदूरों के हितों पर चोट पहुंचा रही है। राज्य कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष रामशंकर तिवारी ने कहा कि कर्मचारियों और मजदूरों के साथ ज्यादती नहीं होने देेंगे। लाल झंडा जलनिगम मजदूर यूनियन के जिलाध्यक्ष राधेश्याम त्रिपाठी ने कहा कि कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं।
बीएसएनएल कर्मी जीतलाल मौर्य, रामबरन सिंह, राजमणि पांडेय, रामसूरत, शेषमणि शुक्ल सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। दोपहर बाद कुछ बैंकों के दरवाजे खुले और अंदर कर्मचारी बैंकिंग कार्य निपटाते रहे। हालांकि पंजाब नेशनल बैंक, ग्रामीण बैंक की अधिकांश शाखाओं में ताला लटकता रहा। मंगलवार को एसबीआई के कर्मचारी हड़ताल पर नहीं थे। पंजाब नेशनल बैंक के सामने एकत्रित ट्रेड यूनियन के नेताओं ने धरना- प्रदर्शन को संबोधित करते हुए दो टूक कहा कि मजदूर विरोधी नीतियां किसी भी दशा में स्वीकार नहीं की जाएंगी। इस मौके पर नारेंद्र प्रसाद, हेमंत नंदन ओझा, शिव कुमार, केएन सिंह, आरके सिंह आदि मौजूद रहे।
आंगनबाड़ी महिलाओं ने मांगा 18,000 मानदेय
आंगनबाड़ी महिला कर्मचारी संघ के दूसरे गुट ने कचहरी में धरना-प्रदर्शन कर मानदेय बढ़ाकर 18,000 रुपये करने की मांग की है। प्रदेश संगठन मंत्री रेखा शुक्ला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने न्यूनतम वेतन की सीमा जो निर्धारित की है, उसे अविलंब भुगतान किया जाए। महिला वक्ताओं ने यूपी के सीएम पर भी अपनी भड़ास निकालते हुए कहा कि आश्वासन देने के बाद भी मानदेय नहीं बढ़ाकर धोखा दिया है। जिसका खामियाजा आगामी लोकसभा चुनाव में भुगतना पड़ेगा।
समर्थन में उतरा फेडरेशन
यूपी फेडरेशन ऑफ मिनिस्ट्रीरियल सर्विस एसोसिएशन भी मंगलवार को कर्मचारियों के समर्थन में उतर आया। बैंक इंप्लाइज यूनियन के अध्यक्ष राजकुमार मिश्र ने कहा कि जब सुप्रीम अदालत ने न्यूनतम वेतन का निर्धारण कर दिया है, तो सरकार को अविलंब भुगतान करना चाहिए। अगर ऐसा सरकार नहीं कर रही है तो यह ज्यादती है। संरक्षक प्यारेलाल मिश्र ने कहा कि यह आंदोलन जारी रहेगा। इस मौके पर महावीर प्रसाद तिवारी, हौसला सिंह, अजय सिंह, अजीत कुमार, अनुज श्रीवास्तव, प्रशांत सिंह, आकाशदीप मिश्र, राजेंद्र प्रसाद, प्रताप नारायण मिश्र, अमित त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।