आवारा मवेशी जिले के किसानों के लिए आफत बने हैं। फसल चरने के साथ ही खेतों को रौंदकर बर्बाद कर रहे हैं। दिन-रात फसलों की रखवाली करने वाले किसान ब्लाक और स्कूलों में जानवरों को कैद करके अपनी नाराजगी प्रकट कर रहे हैं। शासन का जिले की हर ग्राम पंचायतों में गो संरक्षण केंद्र स्थापित करने का निर्देश था, मगर बीडीओ, वीडीओ और प्रधान इसे लेकर दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
गेहूं, चना, मटर, आलू, सरसों की फसलों को आवारा पशु तहस-नहस कर रहे हैं। इससे दिन-रात रखवाली करने वाले किसानों की नींद उड़ गई है। सालभर पहले आवारा पशुओं को गो संरक्षण केंद्रों और कांजी हाउस में कैद करने की व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई थी। जिसमें सभी ग्राम पंचायतों में गो संरक्षण केंद्रों की स्थापना कर आवारा जानवरों को रखने और उनके चारा-पानी की व्यवस्था करने को कहा गया था।
इस अभियान के तहत जिलेभर में 30 गो संरक्षण केंद्र और आठ कांजी हाउस सक्रिय किए गए। जिसमें वर्तमान में 4224 जानवरों को रखा गया है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में आवारा पशु किसानों की फसलों को नष्ट कर रहे हैं। इससे नाराज किसान सरकारी भवनों में जानवरों को बंद करके अपनी नाराजगी प्रकट कर रहे हैं। शुक्रवार को मानधाता विकास खंड और शनिवार को संडवा चंद्रिका के चौरा मिनी सचिवालय में जानवरों को बंद कर किया, मगर पुलिसकर्मियों ने उन्हें फिर छोड़ दिया गया।
डीएम ने सात प्रधानों को थमाया है नोटिस
डीएम ने संडवा चंद्रिका विकास खंड के जोगीपुर, बेरेंद्र, उमरी, मंगरौरा ब्लाक के मदाफरपुर, पूरबपट्टी, चंदुवाडीह, सिकरी कानूपुर के प्रधान और वीडीओ को अविलंब गो संरक्षण केंद्र स्थापित करने के लिए नोटिस थमाया है। इधर, टाउन एरिया अंतू, कटरामेदरीगंज और नगर पालिका परिषद के रंजीतपुर चिलबिला में कान्हा गोशाला का निर्माण हो रहा है।
जानवरों की देखभाल के लिए डॉक्टरों की हुई तैनाती
जिले के गो संरक्षण केंद्रों के जानवरों की नियमित देखभाल के लिए पशु चिकित्सकों की तैनाती की गई है। सीबीओ रात में भ्रमणकर स्वयं भी हकीकत देख रहे हैं। उन्होंने डाक्टरों को चेताया है कि अगर लापरवाही मिली तो कार्रवाई होगी।
जिले की सभी ग्राम पंचायतों में गो संरक्षण केंद्र खोलकर आवारा जानवरों को रखने के लिए बीडीओ और वीडीओ को पत्र जारी किया जा चुका है। अधिकांश प्रधानों के निर्माण नहीं कराने से आवारा जानवर किसानों की फसल नष्ट कर रहे हैं। गो संरक्षण केंद्रों में क्षमता के अनुरूप जानवर हैं। ऐेसे में इन जानवरों के लिए नए स्थान बनाने होंगे। डॉ. विजय प्रताप सिंह, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी