छात्र राजनीति के जरिए देश-प्रदेश की राजनीति में भविष्य तलाशने का मौका बेल्हा के छात्र-छात्राओं केपास नहीं है। जबकि इतिहास गवाह है कि केंद्र व प्रदेश सरकार के कई मंत्री व नेता छात्र राजनीति से ही उस मुकाम तक पहुंचे हैं। कॉलेज प्रशासन की मनमानी के कारण छात्रसंघ चुनाव न होने से बेल्हा के छात्र-छात्राएं अपने हक व अधिकार की मांग नहीं कर पा रहे हैं। जब तब उनकी आवाजों को भी दबा दिया जाता है। जबकि सरकार ने सूबे के सभी विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों में छात्रसंघ का चुनाव कराने के लिए हरी झंडी दी है।
जिले में 4 राजकीय, 7 अुनदानित के साथ लगभग 91 स्ववित्तपोषित कॉलेज संचालित हो रहे हैं। प्राइवेट महाविद्यालयों को तो छोड़ दीजिए, राजकीय महाविद्यालयों में भी कभी छात्रसंघ का चुनाव नहीं कराया गया। जबकि प्रदेश सरकार ने सभी विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में चुनाव लिंगदोह समिति के अनुसार सत्र शुरु होने के आठ सप्ताह के भीतर छात्रसंघ का चुनाव कराने का निर्देश दिया है। सरकार के निर्देश के बाद प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा द्वारा सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति के साथ डिग्री कॉलेज के प्राचार्यों को चुनाव कराने का आदेश जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद कालेज प्रशासन शासनादेश को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। वह अपने ही नियम छात्र-छात्राओं पर चलाना चाहते हैं।
छात्रसंघ न होने की वजह से कॉलेज प्रशासन की मनमानी की आगे छात्र-छात्राओं को झुकना पड़ रहा है। हर दिन कालेज की ओर से छात्र-छात्राओं का शोषण करने के लिए नए नियम लाद दिए जाते हैं। जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान होने के साथ ही शैक्षिक समस्याएं होती हैं। विरोध करने पर उन्हें कालेज से निकाल दिए जाने की धमकी भी दी जाती है। जिससे वह चुपचाप कालेज की प्रताड़ना सहते हैं। ऐसे में वह अपने हक व अधिकार की लड़ाई नहीं लड़ पा रहे हैं। एबीविपी के जिला संयोजक दुर्गेश कुमार ओझा, समाजवादी छात्रसभा के अध्यक्ष सद्दाम व हरिवंश सिंह यूथ बिग्रेड के अध्यक्ष रोहित सिंह का कहना है कि छात्रसंघ का चुनाव कराने के लिए कई बार कुलपति महोदय को ज्ञापन सौंपा गया। साथ ही कालेजों से मांग की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
एमडीपीजी कॉलेज के जनसूचना अधिकारी डॉ. सीएन पांडेय का कहना है कि उनके कॉलेज स्थापना नियमावली में छात्रसंघ का चुनाव कराने का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए चुनाव नहीं कराए जाते हैं। इधर पीबीपीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बृजभानु सिंह का कहना है कि उनके कॉलेज में छात्रसंघ का चुनाव नहीं होता है। बल्कि प्रत्येक विषयों में पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं में से एक प्रतिनिधि चुन लिया जाता है। इस तरह सैकड़ों की संख्या में छात्र नेता छात्र-छात्राओं की समस्याओं को कॉलेज प्रशासन के आगे रखते हैं।