शहर के बाहर सुखपाल नगर इंडस्ट्रियल एरिया में सप्ताह भर से मशीनों की खटपट और कामगारों की आवाजाही थमी हुई है। नोटबंदी के असर से चप्पल, मसाला, साइकिल समेत कई छोटे उद्योगों पर बड़ा प्रभाव पड़ा है। हालत यह हो गई है कि मालिक अपने यहां काम करने वालों को भुगतान नहीं कर पा रह हैं। आर्डर नाम मात्र को हो रहा है। कच्चा माल नहीं मिल रहा है। उत्पादों की बिक्री में 80 प्रतिशत गिरावट आई है। होल सेलर खाते में भी भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। चप्पल, साइकिल व मसाला के लिए आर्डर तो आए हैं, लेकिन रकम का इंतजाम न होने के चलते फैक्ट्री मालिक माल नहीं भेज रहे हैं।
कारखाने में रोजाना का खर्च है 5 हजार
अनुराग खंडेलवाल ने बताया कि कारखाना में रोजाना का खर्च देखा जाए तो 5 हजार से अधिक का है। माल डंप होने और वसूली न हो पाने के कारण अब दिक्कत खड़ी हो गई है। बैंक 24 हजार रुपये से अधिक रकम नहीं दे रहे। जबकि काम करने वाले लोगों को प्रतिमाह मानदेय लगभग 70 हजार रुपये तक देना पड़ता है। उधर कच्चे माल को भी खरीदना होता है। इससे व्यापार ज्यादा प्रभावित हो रहा है। अनुराग खंडेलवाल ने बताया कि कच्चा रबर कानपुर और दिल्ली से मंगाया जाता है। कंपनी में आने के बाद उसे तैयार किया जाता है। फिर कहीं उससे चप्पल तैयार किया जाता है।
दोपहर दो बजे, ओमनी हवाई चप्पल का कारखाना
सुखपाल नगर इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित ओमनी हवाई चप्पल के कारखाने में पांच लोग काम कर रहे थे। करीब सात लोग छुट्टी पर चल रहे हैें। कच्चा माल खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है। तैयार चप्पल कारखाने के अंदर ही डंप किए जा रहे हैं। मालिक अनुराग खंडेलवाल ने बताया कि हजार और पांच सौ के नोट बंद होने से 80 प्रतिशत बिक्री घट गई है। ट्रांसपोर्टर कच्चे माल को लाने के लिए तैयार नहीं हैं। पहले से खरीदकर रखे माल को महंगे दामों में दे रहे हैं। पैसा खाते में ट्रांसफर नहीं हो रहा है। इसके चलते होलसेलर पुरानी खरीद का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। उनके पास हजार पांच सौ के पुराने नोट रखे हैं, मगर हम वो नोट लेना नहीं चाहते। इसका खासा असर व्यापार पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि ओमनी हवाई चप्पल की बिक्री ज्यादा बिहार, झारखंड, इलाहाबाद, जौनपुर, सुल्तानपुर, बनारस समेत आसपास के जिलों में होती है। व्यापारी आर्डर तो कर रहे हैं, मगर भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। इसके चलते तैयार चप्पल भी भेजा नहीं जा रहा है। कारखाने में काम करने वाले लोग खाते में पैसा लेना पसंद नहीं कर रहे हैं। उसके चलते उनका मानदेय नहीं दिया जा रहा है। कई काम करने वाले लोग कंपनी में आना बंद कर दिए हैं।
दोपहर 2.45 बजे, स्टार इंडिया साइकिल कारखाना
सुखपाल नगर इंडस्ट्रियल एरिया में स्टार इंडिया साइकिल कारखाना भी संचालित हो रहा है। शुक्रवार को कारखाने में मात्र एक चौकीदार ही बैठा था। काम करने वाले लोग कंपनी में नहीं आ रहे हैं। इतना ही नहीं साइकिल के लिए न तो आर्डर आ रहा है और न ही बिके हुए माल का पैसा आ रहा है। इसके चलते उद्योग बंद हो चुका है। कंपनी के मालिक इन्द्रर कुमार सरोज ने बताया कि फुटकर पैसा मिल नहीं रहा है। बिके हुए माल का पैसा भी नहीं मिल रहा है।
दोपहर 2.30 बजे, रामा मसाला कंपनी
कंपनी में मात्र मैनेजर नंद कुमार मिश्र बैठे थे। कारखाना में ताला लटक रहा था। उन्होंने बताया कि हजार और पांच सौ की नोट बंद होने का खामियाजा व्यापारी भुगत रहे हैं। रामा मसाले की सप्लाई इलाहाबाद, प्रतापगढ़, कौशांबी, जौनपुर, सुलतानपुर, फतेहपुर, कानपुर में की जाती है। माह भर पहले मसाले को होलसेलर के पास भेज दिया गया था। भुगतान अभी तक नहीं हो पाया है। अब तक ज्यादातर सामान देते समय ही वसूली की जाती थी।