Journey in Tejas trains will be more costly than Shatabdi Trains
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न ऑटोमैटिक सिग्नल और न ही झंडी, बस डंडा पटकने मात्र से ही रूकती और चलती हैं रेल गाड़ियां। यकीन नहीं होता न लेकिन ये सच है। प्रतापगढ़ स्टेशन पर ये नजारा आम है। यहां एक कर्मचारी हाथ में डंडा या लोहे की रॉड लेकर ट्रेनों को चलने और रूकने का संकेत देता है। इसकी वजह सिग्नल प्वाइंट का फेल होना है।
प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन पर जीआरपी थाने के सामने डायमंड क्रॉसिंग पर दो पटरियों के बीच तालमेल न बैठने से यहां डेली सिग्नल प्वाइंट फेल रहता है। जानकारों के मुताबिक यहां दो पटरियों के बीच इतना गैप रहता है कि प्लेटफार्म एक पर आने और यहां से जाने वाली कोई भी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो सकती है। अगस्त माह में एक मालगाड़ी इंजन दुर्घटनाग्रस्त हो चुका है।
लंबे समय से चली आ रही इस गंभीर समस्या का हल रेलवे नहीं ढूंढ़ पा रहा है। स्लीपर बदलने के बाद भी समस्या ज्यों का त्यों बनी रही। जब भी किसी गाड़ी को प्लेटफार्म एक पर लाना और यहां से छोड़ना होता है तो पहले ही सिग्नल विभाग का एक कर्मचारी डायमंड रेलवे क्रॉसिंग पर जाकर खड़ा हो जाता है। एसएम का निर्देश मिलने पर वह डंडे या लोहे की रॉड से प्वाइंट को ठोंकता है। चोट के बाद पटरियों का गैप भर जाता है और तब कर्मचारी से इशारा पाकर ड्राइवर ट्रेन को आगे बढ़ाता है। एसएस टीएन मिश्रा का कहना है कि यह मामला सिग्नल और इंजीनियरिंग विभाग के अफसरों की जानकारी में है। वहीं इसका निदान कर पाएंगे।
नहीं मिल रहे नट-बोल्टः डायमंड क्रॉसिंग पर प्वांइट फेल होने की समस्या अंग्रेजों के जमाने से है। रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि अब इसमें खराबी आती है तो उसको बनाना बहुत मुश्किल होता है। इसकी एक वजह इसके कलपुर्जे नट,बोल्ट नहीं मिलना भी है।