प्रतापगढ़। जिला अस्पताल को उच्चीकृत मेडिकल कॉलेज बनाने की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। शासन ने एक फरवरी से इसका निर्माण शुरू कराने का आदेश दिया था। पहले तो अफसरों ने तेजी दिखाई, लेकिन अब काम थम गया है। जिला और महिला अस्पताल के पुराने भवनों को तोड़े जाने और रास्ते से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी ठंडे बस्ते में चली गई। 2022 तक शासन ने इसे तैयार करने का निर्देश दिया था, लेकिन अब लोगों को इसके लटकने का डर सताने लगा है।
सरकार बनने के कुछ महीनों बाद ही सूबे के मुख्यमंत्री योगी ने प्रतापगढ़ को मेडिकल कालेज का तोहफा दिया था। शासन के आदेश पर जिला प्रशासन ने जमीन भी चिह्नित कर ली। राजकीय निर्माण निगम रायबरेली को इसके निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था नामित किया गया। मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए 22 करोड़ रुपये का बजट भी शासन ने पास कर दिया। एक फरवरी से निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए कार्यदायी संस्था को आदेश दिया था। मगर 15 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। शुरु में अफसरों ने काफी तेजी दिखाई। मेडिकल कालेज निर्माण के लिए जिला व महिला अस्पताल को तोड़कर आठ मंजिला भवन तैयार करने और चिकित्सकों के साथ नर्सों के लिए बने आवासों को तोड़कर गिराने के लिए आदेश भी जारी कर दिया गया। करीब एक महीने पहले जिला अस्पताल के सीएमएस ने नर्स और डॉक्टरों को सरकारी आवास सात दिनों के अंदर खाली करने के लिए नोटिस भी जारी कर दिया।
जिला अस्पताल के बाहर अतिक्रमण हटाने के लिए भी नाप-जोख की गई। ऐसे में लोगों को आस जगी कि अब जल्द ही उनका सपना पूरा होने वाला है, लेकिन अचानक पता नहीं क्या हुआ कि सबकुछ ठंडे बस्ते में चला गया। न आवास तोड़े गए और न ही मेडिकल कालेज की नींव पड़ सकी। स्वास्थ्य विभाग के एक कर्मचारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था ने टेंडर निकाला था। हैदराबाद की दो पार्टियों ने मिलकर टेंडर लिया। टेंडर पास होने के बाद किसी कारण बस उसे फिर निरस्त कर दिया गया। अब रिटेंडर निकाला गया है। रिटेंडर कब पूरा होगा इसके बारे में अभी कार्यदायी संस्था भी कुछ नहीं बता पा रही है।