Step-motherly treatment of people living in UP-Bihar in Maharashtra
महाराष्ट्र में यूपी-बिहार के रहने वाले लोगों से सौतेला व्यवहार
सीमा पर रुपये न देने पर हो रही पिटाई, टेंपो लोडर से तीन दिन में पहुंचे परदेसियों ने बनाई दास्तां
दो प्रदेशों में नहीं मिला खाने को दाना, पीने के लिए पानी को भी पड़ा भटकना
संवाद न्यूज एजेंसी
रखहा। महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के संक्रमण के बीच मदद के बजाए वहां यूपी व बिहार के प्रवासी मजदूरों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। न खाने का कोई इंतजाम है और न ही रहने की कोई व्यवस्था। लोगों को घर के लिए भगाया जा रहा है। सीमा पर लोगों से रुपये भी वसूले जा रहे हैं। मुुंबई से टेंपो लेकर तीन दिन में पहुंचे परदेसियों ने अपनी दास्तान सुनाई तो हर कोई दंग रह गया।
कंधई थाना क्षेत्र के रहने वाले अविनाश, त्रिभुवननाथ, अमरबहादुर, मेवालाल, धीरेंद्र, राहुल सरोज, लालचंद्र, महेश कुमार मंगलवार की रात टेंपो लोडर से अपने घर पहुंचे। बेलखरनाथ सीएचसी में थर्मल स्क्रीनिंग कराने पहुंचे इन लोगों ने बताया कि 3 मई की रात सभी टेंपो से घर के लिए निकले। मुंबई की सीमा कल्याण व एरोली पहुंचने पर पुलिस ने 15 सौ रुपये की वसूली करने के बाद ही आगे जाने दिया। घर आने के पहले ही सभी के रुपये खत्म हो चुके थे। किराने के कमरे के लिए जो धरोहर राशि नौ हजार रुपये दी थी, वही लेकर घर आए। महाराष्ट्र में बिहार व यूपी के लोगों से दुर्व्यहार करते हुए पुलिस व स्थानीय लोग भगा रहे हैं। पुलिस व प्रशासनिक अमले द्वारा कोई मदद नहीं की जा रही है। महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश में कहीं भी भोजन नसीब नहीं हुआ। सीमा पर रुपये न देने पर लोगों की पिटाई भी की जाती रही। महाराष्ट्र सरकार फर्जी घोषणा कर रही है। यहां तक कि पानी के लिए सैकड़ों किमी चलने रहना पड़ा। मंगलवार की शाम प्रयागराज की सीमा पर कुछ खाने को नसीब हुआ। घर पहुंचने पर सभी ने राहत की सांस ली। थर्मल स्क्रीनिंग के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम सभी को प्राइमरी स्कूलों में रुकने का सुझाव देती रही। फिलहाल परदेशियों का दर्द सुनकर हर किसी की आंखों में आंसू आ जाते रहे।