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स्टेशन, रोडवेज, चौक, बेल्हा देवी मंदिर पर नहीं दिखा कोई टोकने वाला

Wed, 29 Jul 2015 01:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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प्रतापगढ़। पंजाब में फिदायीन आतंकियों के हमले के बाद भले ही शासन ने अलर्ट घोषित कर दिया है, लेकिन निर्देश जारी होने के 24 घंटे बाद भी कहीं अलर्ट दिखा नहीं। शहर में सार्वजनिक स्थल हो या बाजार कहीं भी आतंकी बम और बारूद रखकर कुछ भी कर सकते हैं। इसकी भनक तक पुलिस को नहीं लग सकेगी। मंगलवार को अमर उजाला टीम शहर के सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए निकली तो कदम-कदम पर सुरक्षा व्यवस्था में खामियां ही खामियां मिलीं। ऐसे में किसी भी भीड़भाड़ वाले स्थान पर खुदा न खास्ता आतंकी हमला हो जाए तो फिर अफसर क्या करेंगे ये सवाल मौजूं हो गया है।
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जनपद के ऐतिहासिक चौक घंटाघर पर मजदूर अपनी साइकिल खड़ी कर आराम कर रहे थे। इस दौरान एक युवक हाथ में बोरी में रखा सामान लेकर पहुंचा और एक साइकिल के पीछे कैरियर में दबा दिया। मजदूरों में सुगबुगाहट नहीं हुई। करीब ही यातायात के सिपाही व होमगार्ड भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। नजदीक ही मकंद्रूगंज पुलिस चौकी पर सिपाही बैठे थे, लेकिन वे भी अपने में मस्त दिखे। करीब आधे घंटे तक किसी ने भी साइकिल पर रखी बोरी के बारे में जानकारी हासिल करना मुनासिब नहीं समझा।

टीम पुलिस प्रशासन की चौकसी देखने सिविल लाइन स्थित रोडवेज बस अड्डा पहुंची। यहां लोग बसों के इंतजार में बैठे थे। यात्री प्रतीक्षालय में भी दर्जनभर से अधिक लोग बसों का इंतजार कर रहे थे। इस बीच बाइक सवार एक युवक पहुंचा। उसके हाथ में काला बैग था। वह एक यात्री के पास पहुंचा और इधर-उधर देखने के बाद खाली सीट पर बैठ गया। कुछ देर बाद वह उठकर टहलने लगा और बैग छोड़कर निकल गया। उसे किसी ने टोका नहीं। पुलिसकर्मी भी परिसर के इर्द-गिर्द नहीं दिखे।
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बाइक सवार दो युवक बेल्ह देवी मंदिर पहुंचे। एक युवक अपने हाथ में लिया झोला मुख्य गेट के पिलर के करीब बनी सीढ़ी के नीचे रख देता है। भक्त पूजन-अर्चन के लिए आते-जाते रहे। झोला रखने के बाद युवक बाहर निकल आया। किसी ने उसे रोका टोका नहीं। सुरक्षाकर्मी भी मंदिर परिसर से नदारद थे। करीब पौन घंटे तक के इंतजार के बाद भी किसी ने थैले की बाबत जानकारी का प्रयास नहीं किया। गौरतलब है कि बेल्हा देवी मंदिर आतंकवादियों के निशाने पर है। इसके चलते ही केंद्र सरकार सुरक्षा का जायजा लेने के लिए हर वर्ष एनएसजी को भेजती है।

टीम के लोग स्टेशन पहुंचे। एक बुजुर्ग बोरी में सामान रखकर पहुंचा। प्लेटफार्म पर यात्रियों की मौजूदगी में बोरी रख दी। कुछ देर तक इधर-उधर देखने के बाद वृद्ध लोगों की नजरों से बचते हुए प्लेटफार्म से बाहर निकल आया। उसकी बोरी लावारिस हालत में पड़ी रही। जीआरपी और आरपीएफ के सिपाही दूर-दूर तक नहीं दिखाई पड़े। रेलवे स्टेशन के किसी कोने पर भी अलर्ट के बाद सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए। हर ओर से बेरोकटोक लोग आते-जाते रहे। संदिग्ध लोगों की चेकिंग तो दूर की बात, प्लेटफार्म के साथ बाहर भी सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं दिखी।
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