आम लोगों के समस्याओं की संतोषजनक सुनवाई के मानक पर प्रतापगढ़ प्रदेश में फिसड्डी साबित हुआ है। जबकि बांदा के जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह को पहला स्थान मिला है। सिद्धार्थनगर के डीएम कुणाल सिक्कू दूसरा स्थान पाने में सफल रहे हैं। 75 जिलों की सूची में प्रतापगढ़ का नाम आखिरी है।
प्रदेश सरकार ने आम लोगों की शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए कुछ कसौटियां तय कर रखी हैं। इसमें जिलाधिकारी द्वारा प्राप्त शिकायतों के निस्तारण के लिए मातहत अधिकारी के पास भेजने में लगने वाले समय, समयसीमा के अंदर शिकायतों के निस्तारण, शिकायतकर्ता की संतुष्टि जैसे काम शामिल हैं। जिलाधिकारी व एसएसपी कार्यालय में आने वाली शिकायतों को जन-सुनवाई पोर्टल पर फीड करने पर भी अफसरों को नंबर मिलते हैं। जिलाधिकारियों का मूल्यांकन 90 से 95 अंक पर करके रैंक तय की जाती है।
शासन द्वारा जुलाई महीने में जिलाधिकारियों केस्तर पर जनसुनवाई के मामलों में की गई कार्रवाई के मूल्यांकन में कई डीएम की परफार्मेंस सरकार की कसौटी पर खरी सामने आई है। कई का कामकाज निराश करने वाला है। जनसुनवाई को तवज्जो न देने वाले कई जिलों की स्थिति ये है कि उन्हें शिकायतों को मातहत अधिकारियों तक अग्रसारित करने, सी श्रेणी के शिकायतों पर कार्रवाई और डीएम व एसएसपी के यहां आने वाले आवेदनों की फीडिंग के मानक पर जीरो-जीरो नंबर मिले हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं जन समस्याओं की नियमित सुनवाई करते हैं। वह जहां भी जाते हैं आम लोगों से मिल कर उनकी बात सुनने के लिए समय निकालते हैं। उन्होंने सभी अधिकारियों को 9 से 11 बजे तक अपने दफ्तर में बैठकर जनता की समस्याएं सुनने और उनका तय समयसीमा में समाधान कराने को कहा है। इसी तरह तहसील व थाना स्तर पर संपूर्ण समाधान दिवस के आयोजन होते हैं। इन सभी शिकायतों पर की जाने वाली कार्यवाही की ऑनलाइन मानीटरिंग की जाती है। खास बात ये है कि यह मूल्यांकन मुख्यमंत्री कार्यालय की निगरानी में ही होता है।
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