शिक्षकों के कल्याण के लिए राज्य विश्वविद्यालय प्रयागराज ने नई पहल की है। गंभीर बीमारी व परिवार में किसी तरह की आपदा आने पर उन्हें शिक्षक कल्याण कोष से सहायता दी जाएगी। इसका लाभ विश्वविद्यालय के साथ ही राजकीय, अनुदानित व स्ववित्तपोषित कालेज के शिक्षकों को भी मिलेगा। विश्वविद्यालय की इस पहल से शिक्षकों में खुशी की लहर है।
राज्य विश्वविद्यालय प्रयागराज ने शिक्षक कल्याण कोष के गठन का निर्णय लिया है। शिक्षक कल्याण कोष की राशि का उपयोग शिक्षकों की सहायता के लिए किया जाएगा। कोष का नाम ‘प्रयागराज राज्य विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण कोष’ होगा। जिसे संक्षेप में शिक्षक कोष कहा जाएगा। कोष के क्रियाकलापों का संचालन एक समिति द्वारा किया जाएगा। समिति के अध्यक्ष कुलपति या उनके द्वारा नामित विश्वविद्यालय का वरिष्ठतम आचार्य होगा। कुलसचिव पदेन सचिव होंगे। वरिष्ठ व योग्य शिक्षकों को समिति का सदस्य बनाया जाएगा। कोष का लाभ शिक्षक और उनके पति या पत्नी को मिलेगा।
कोष की समस्त धनराशि एक अलग खाते में होगी। जो कि ‘इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण कोष’ के नाम से होगा और खाता किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में होगा। खाते का संचालन अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष के हस्ताक्षर से होगा। कुलसचिव डॉ. शेषनाथ पांडेय के मुताबिक कोष का उद्देश्य सदस्यों को गंभीर बीमारी, आपदा या मृत्यु की दशा में संतप्त पति व पत्नी को सहायता प्रदान करना है। कोष की आय को श्रोत परीक्षकों के देयकों से की गई कटौती व अन्य दान, उपहार और चंदा होगा।
7 वर्ष की सेवा अनिवार्य
स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के शिक्षकों को लाभ देने के लिए विश्वविद्यालय ने नियम में कुछ बदलाव किया है। शिक्षकों को लाभ प्राप्त करने के लिए कम से कम 7 वर्ष की सेवा अनिवार्य है।
एसडीएम ने दिलाई मतदान की शपथ
प्रतापगढ़। पीबीपीजी कालेज में गुरुवार को मतदाता जागरूकता कार्यक्रम के तहत मुख्य अतिथि एसडीएम सदर एसपी सिंह ने छात्र-छात्राओं को मतदान की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के बाद छात्र-छात्राओं को मतदान के लिए जागरूक किया गया। प्राचार्य डॉ. बृजभानु सिंह ने भारत स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत छात्र-छात्राओं को स्वच्छता का पाठ पढ़ाया। कालेज परिसर में ‘प्रतापगढ़ ने भरी उड़ान, शत प्रतिशत हम करें मतदान’ का नारा लगाया। इस अवसर पर नगरपालिका अधिशाषी अधिकारी सुभाषचंद्र, डॉ. मो. अनीस, आनंद मिश्र, विंध्याचल सिंह, डॉ. पंकज भान सिंह, डॉ. बीएनपी सिंह, डॉ. उपेंद्र सिंह, डॉ. राजीव सिंह, डॉ. धर्मेंद्र प्रताप सिंह मौजूद रहे।