भूमि संरक्षण इकाई आईडब्ल्यूएमपी में विकास कार्य कराने के लिए तीन साल से चवन्नी का बजट नहीं आ रहा है। इससे विभाग में तैनात अधिकारी और कर्मचारी घर बैठे वेतन ले रहे हैं। सिंचाई विभाग में विलय करने का आदेश तीन साल पहले जारी हुआ, मगर शीर्ष अफसरों की लापरवाही के चलते अभी तक विभाग का मर्ज नहीं होने से अधिकारी और कर्मचारी हाजिरी लगाकर राजनीति के दल-दल में फंसे नेताओं पर कटाक्ष करने में पूरा दिन व्यतीत कर रहे हैं।
कृषि विभाग की शाखा भूमि संरक्षण इकाई आईडब्ल्यूएमपी और सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग का विलय सिंचाई विभाग में करने का आदेश तीन साल पहले जारी हुआ था। यह आदेश जारी होने के बाद शासन ने विकास कार्य के लिए बजट देना बंद कर दिया। विभागीय अधिकारियों ने अधूरे कार्यो को पूर्ण करने के लिए जो धनराशि मांगी गई थी, उसे मिलते ही कार्य पूर्ण कराकर कर्मचारी इंतजार कर रहे हैं, कि उन्हें नई जिम्मेदारी कब मिलेगी। मगर यह दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि तीन साल का वक्त गुजर गया, मगर अभी तक कोई आदेश नहीं आया। विभाग को बजट नहीं मिलने से 14 कर्मचारियों वाला विभाग इस समय संज्ञा शून्य बना हुआ है। हां, इतना जरूर है कि कर्मचारियों के खाते में प्रतिमाह वेतन पहुंच रहा है। विभाग में कोई काम नहीं होने और विभागीय अधिकारी के कार्यालय नहीं आने से कर्मचारी भी मनमानी पर उतारू हैं।
महोबा जिले के भूमि संरक्षण अधिकारी को जिले का अतिरिक्त प्रभार मिला हुआ है। जनवरी माह में जिले का प्रभार लेने के बाद वह कभी भी कार्यालय नहीं आए। कर्मचारियों के वेतन बिल पर दस्तखत बनाने के लिए लिपिक को महोबा बुला लेते हैं।
भूमि संरक्षण अधिकारी आईडब्ल्यूएमपी का कार्यालय स्टेशन के निकट ऐसी गली में हैं, जिसे अफसर भी जल्दी नहीं खोज पाएंगे। दरअसल, यह खेल कर्मचारियों का है, विकास भवन के निकट कार्यालय होने पर अफसरों के औचक निरीक्षण का भय रहता है। मगर इस कार्यालय का औचक निरीक्षण करने कभी कोई अफसर नहीं पहुंचा।
विभाग के कर्मचारी इस समय संशय में हैं, तीन साल से विभाग को विकास के लिए एक कौड़ी नहीं मिली है। सिंचाई विभाग में विलय करने का आदेश जारी हुआ, मगर हम लोग न इधर में हैं और न उधर में । अधिकारी इतनी दूर रहता है कि हम लोग अपना दर्द नहीं सुना पाते हैं।
आरएन वर्मा, अवर अभियंता, भूमि संरक्षण इकाई, आईडब्ल्यूएमपी