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Pratapgarh News: छोटे किसान खेत की मेड़ों पर तैयार करेंगे अरहर की फसल

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अब छोटे किसान खेत की मेड़ों पर अरहर की बोआई कर मुनाफा कमा सकेंगे। कम खेत वाले किसानों को मेड़ पर खेती करने से अधिक लाभ होगा। खेत की मेड़ों पर अरहर फसल की बोआई से मिट्टी कटाव रुकेगा। फसल तैयार करने में पानी की खपत भी कम होगी।
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कृषि वैज्ञानिक डॉ. एनके सिंह ने बताया कि मेड़ों की ऊंचाई 30-45 सेमी और चौड़ाई 45-60 सेमी तैयार करना होगा। खेत के ऊपरी हिस्से को समतल करना होगा। ताकि बीज बोने में आसानी होगी। मेड़ों के बीच की दूरी 2-3 मीटर रखने से पौधों के फैलने के लिए भी पर्याप्त स्थान मिलेगा। प्रति हेक्टेयर 12-15 किग्रा बीज की बोआई करनी होगी।
मेड़ के ऊपर 2-3 सेमी गहराई में बीज की बोआई करने के बाद हल्की मिट्टी से ढकना होगा। प्रति हेक्टेयर पांच से दस टन गोबर का खाद का छिड़काव करना होगा। मेड़ पर खेती से जल निकासी बेहतर होगी और पौधों में सड़न से बचाव होगा। वहीं, राजकीय गोदामों पर यूपीएएस-120, नरेंद्र-1, आईसीपीएल-87119 अरहर के बीज उपलब्ध है। बारिश के साथ जून से जुलाई के बीच अरहर फसल की बोआई शुरू कर दी गई है।
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इनसेट-
अरहर के साथ सोयाबीन, उड़द की खेती से होगा लाभ
जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि छोटे किसान के पास खेत कम होते हैं। कम खेत में अधिक फसल तैयार कर पाना मुश्किल होता है। ऐसे में किसानों की आमदनी भी घटती है। खेत के मेड़ों पर अरहर की फसल की बोआई करने के साथ किसान उड़द और सोयाबीन की अंतरवर्तीय खेती भी कर सकेंगे। इस तकनीक से छोटे किसानों को अधिक लाभ होगा।
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