जिले की खस्ताहाल सड़कें लोगों को बीमार बना रही हैं। गड्ढा युक्त सड़कों पर सफर करने से लोगों की हड्डियां कमजोर हो रही हैं। स्लिपडिस्क का खतरा लोगों में बढ़ रहा है। मांसपेशियों में सूजन बढ़ने से लोग कमर दर्द जैसी बीमारी के चपेट में आ रहे हैं। प्रदेश सरकार का सड़कों को गड्ड़ा मुक्त करने का अभियान जिले में ज्यादा असरदार नहीं रहा। हाईवे से लेकर दूसरी सड़कें क्षतिग्रस्त हैं। जिसके चलते लोग बीमारी की चपेट में आ रहें हैं।
इलाहाबाद- फैजाबाद राजमार्ग पर भुपियामऊ से लेकर सोरांव तक 40 किमी सड़क की दशा बद से बदतर है। बड़े-बड़े गड्ढों के चलते हाईवे पर चार पहिया व दुपहिया से सफर करना आसान नहीं है। हाईवे से हर दिन नेता से लेकर अधिकारी तक सफर करते हैं। इसके बाद भी लोग इस समस्या को दूर करने का प्रयास तक नहीं कर सके। परिवहन विभाग को भी लोगों ने शिकायतें भेजकर बदहाल हाईवे को दुरुस्त कराने की मांग की, लेकिन साल भर से अधिक समय से दशा सुधर नहीं सकी। एक किमी नया माल गोदाम रोड पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। शीतलागंज से उड़ैयाडीह पांच किमी मार्ग की दशा बद से बदतर है। मानधाता से विश्वनाथगंज रोड करीब सात किमी की सूरत 2014 से बिगड़ी तो अभी तक सुधर नहीं सकी। देवकली से लेकर सरोज तिराहे तक मार्ग पर चलना दूभर है। इसके अलावा पट्टी क्षेत्र में भी सड़कों की दशा बहुत ही खराब है। कोहड़ौर से लेकर मदाफरपुर मार्ग करीब आठ किमी का सफर हिचकोले लेते हुए गुजरता है। सरुआवा से संडवा चंद्रिकन धाम करीब पांच किमी का रास्ता तय करने में लोगों को अधिक समय लग जाता है। जेल रोड से लेकर रखहा बाजार तक जाने के लिए छह किमी रोड पर जगह-जगह गड्ढे हैं। कटरा से मानधाता जाने वाला 12 किमी रोड भी बदहाल हो चुका है। कटरा के पहले बनाई जा रही सड़क अधूरी छोड़ दी गई है। इससे आसपास के लोग धूल के गुबार से परेशान रहते हैं। निर्माणाधीन सड़क को लेकर ग्रामीणों ने प्रदर्शन करते हुए अधिकारियों व प्रदेश के डिप्टी सीएम को भी अवगत कराया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। समस्या जस की तस बनी हुई है। इन सड़कों पर बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भर जाता है। जिससे आवागमन में दिक्कत का सामना लोगों को करना पड़ता है।
अस्पताल में बढ़ गई मरीजों की संख्या ः जिले की खस्ताहाल सड़कों पर सफर करने से लोगों में कमर, रीढ़ की हड्डी के दर्द के साथ ही पेट की समस्याएं बढ़ रहीं हैं। सरकारी अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 50 से 60 फीसदी मरीज इन समस्याओं से संबंधित पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल के डॉक्टर संजय शर्मा ने बताया कि 40 साल से अधिक उम्र के 75 फीसदी लोग कमर दर्द के मरीज हो चुके हैं। इससे कम उम्र के मरीज 25 फीसदी हैं। लोगों को शुरुआत में पता नहीं चलता, धीरे-धीरे कमर में दर्द होने लगता है।
टूटी सड़कों पर सफर रहता है जानलेवा ः प्रदेश की योगी सरकार के निर्देश पर जिले की सड़कों को गड्ढामुक्त करने का निर्देश दिया गया। बरसात में सड़कें उखड़ गईं हैं।