12 60 और 80 रुपये में बिकने वाली प्याज अचानक 12-15 रुपये में खुले बाजार में बिक रहा है। इससे आम आदमी जहां हैरत में हैं, वहीं प्याज के कारोबारियों का धंधा ही चौपट हो गया है। दरअसल, लॉकडाउन में प्याज की मांग पूरी तरह घट गई है। होटल, ढाबों के साथ ही वैवाहिक कार्यक्रमों पर रोक लगने से प्याज खरीदने वालों की संख्या में बेहद कमी आ गई है। आलम यह है कि थोक के भाव में 8-9 रुपये प्रति किग्रा की दर से बिक रहा है। इससे प्याज कारोबारियों के चेहरे मुरझा गए हैं।
लॉकडाउन ने प्याज के थोक विक्रेताओं को बड़ा झटका दिया है। फरवरी और मार्च माह में 60 रुपये प्रति किग्रा की दर से प्याज की बिक्री करने वाले दुकानदार आज 12-15 रुपये प्रति किग्रा की दर से बेचने को मजबूर हैं। दरअसल, जनवरी, फरवरी माह में प्याज महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश से आता था। इसलिए बाजारों में काफी महंगे दर पर बिक रहा था।
अब प्याज यूपी के झांसी और एमपी के सागर से आ रहा है। गांवों में स्थानीय किसानों ने भी प्याज तैयार कर लिया है। इधर, लॉकडाउन में होटल, ढाबा, रेस्तरां बंद होने के साथ वैवाहिक कार्यक्रमों पर रोक लगने से प्याज की मांग बेहद घट गई है।
इससे थोक विक्रेता अब औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर हैं। प्याज के थोक कारोबारी मनीष सिंंह ने बताया कि झांसी से प्रत्येक दूसरे दिन लगभग तीन 75 मीट्रिकटन प्याज मंडी में आता है। जबकि पहले प्रतिदिन 90 मीट्रिकटन प्याज की मांग रहती थी। इससे अब खरीद रेट पर पर बेचकर काम चलाया जा रहा है।
बंगाल का नौ रुपये और आठ में बिक रहा झांसी का प्याज
पश्चिम बंगाल से आने वाले प्याज का थोक भाव 9.00-9.50 रुपये और झांसी से आने वाला प्याज 8.00-8.30 रुपये की दर से बिक रहा है। जबकि खुले बाजार में दुकानदार 12 से 15 रुपये प्रति किग्रा की दर से बेच रहे हैं।
मंडी और बाजार का एक समय
महुली मंडी और फुटकर बाजार का समय एक होने से व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। सुबह पांच बजे से साढ़े आठ तक बजे तक मंडी का समय है। जबकि सुबह छह बजे से दस बजे तक फुटकर दुकानदारों को खोलने का समय निर्धारित किया गया है। इससे मंडी में सब्जी खरीदने वाले दुकानदारों को बेचने की समस्या होती है।
जमाखोरी करने वालों की डूब गई लुटिया
प्याज की जमाखोरी करने वाले व्यापारियों की लुटिया ही डूब गई। लाखों रुपये का प्याज खरीदकर डंप करने वालों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। सहालग में मुनाफा कमाने की तैयारी करने वालों का मूलधन भी नहीं निकल पा रहा है। इससे बगैर प्याज काटे ही उनकी आंखों से आंसू निकल रहे हैं।