शहर की मोनू, संध्या, रश्मि व कुमुद ने काफी दिनों से एक-एक पैसे जोड़ रखे थे। अब उस रुपये से उन्होंने भाई को रक्षाबंधन के पर्व पर हेलमेट गिफ्ट करने का फैसला लिया है। परिवार के लोगों से मिलने वाली पाकेट मनी से जो बचत की थी, उसे निकालकर भाइयों के लिए हेलमेट खरीद लाई हैं। शहर की चिकित्सक व शिक्षक बहनें भी भाइयों का जीवन बचाने के लिए हेलमेट खरीद लाई हैं, ताकि वह भाई को उपहार दे सकें।
आंवला नगरी इस रक्षाबंधन पर नया इतिहास रचेगी। रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उन्हें हेलमेट भी उपहार में देने वाली हैं। शहर से लेकर ग्रामीण अंचल की युवतियों ने अपने भाइयों के लिए अपनी पाकेट मनी से बचाए पैसों को भाई की सुरक्षा पर खर्च करने का फैसला किया है। स्टेशन रोड की रहने वाली कुमुद त्रिपाठी नेहरू युवा केंद्र की वालंटियर हैं। वह आए दिन हादसों को देखकर व्यथित रहती थीं। रक्षाबंधन पर भाई को सुरक्षित बाइक चलाने के लिए हेलमेट खरीदकर रख लिया है। मोहनगंज के सिटकहा की रहने वाली शिक्षामित्र संध्या देवी ने बचत वाली रकम से भाई के लिए पहले घड़ी खरीदने की सोची थी, लेकिन अब वह अपने छोटे भाई के लिए हेलमेट खरीद लाई हैं। शेखपुर अठगवां की रहने वाली मोनू मिश्रा ने पिता व ननिहाल में मिले रुपये को संजोकर रखा था। भाई दुर्गेश बाइक चलाते समय हेलमेट नहीं पहनता था। जिसके चलते मोनू ने उसे हेलमेट खरीदने की ठान ली है। शिक्षिका रश्मि मिश्रा भी अपने भाई को लेकर अक्सर चिंतित रहती थीं। रश्मि ने अपने भाई के लिए रक्षाबंधन के पर्व पर राखी के साथ हेलमेट उपहार देने का निर्णय लिया है। वह बाजार से हेलमेट खरीद लाई हैं। शिवजीपुरम की रहने वाली दंत चिकित्सक अनामिका पांडेय भी भाई की सुरक्षा के लिए खासी चिंतित रहती थीं। अमर उजाला में प्रकाशित खबर देखने के बाद उन्होंने भाई को हेलमेट खरीदकर देने और खुद भी हेलमेट लगाकर स्कूटी चलाने का निर्णय लिया है। वह कहती हैं कि हर बार भाई को राखी के साथ कोई न कोई उपहार जरूर देती थीं। इस बार हेलमेट गिफ्ट करेंगी।
आप भी जुड़िए हमारी इस मुहिम से
इस रक्षाबंधन पर अमर उजाला (राखी के साथ हेलमेट) मुहिम शुरू कर रहा है। हमारी इस मुहिम से जुड़कर बहनें न केवल अपने भाइयों को हेलमेट के लिए प्रेरित कर रही हैं, बल्कि उपहार स्वरूप हेलमेट भी भेंट करने की भी तैयारी कर रही हैं। अगर आप भी इस मुहिम से जुड़ना चाहती हैं तो अपने विचार 500 शब्दों में लिखकर एक सेल्फी विद हेलमेट हमें भेज दीजिए।
हेलमेट पहना होता तो बच जाती जिंदगी
जनपद में 1 जनवरी 2018 से लेकर 31 जुलाई तक सडक़ पर 325 लोगों की मौत हुई है। जिसमे से 207 बाइक सवार थे। इन लोगों ने हेलमेट नहीं पहन नहीं रखा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक सिर में सभी को गंभीर चोटें लगी थीं। यदि वह हेलमेट पहने होते तो शायद उनकी जिंदगी बच जाती। मानधाता की रहने वाली मोहनी बहुत उदास है। गत दिनों जेठवारा में उसके भाई लालजी की बाइक भिड़ंत में जान चली गई थी। मोहनी अब किसे राखी बांधेगी, यह सोचते ही उसकी आंखों से आसूं निकलने लगे। यह एक बहन का दर्द नहीं, बल्कि सैकड़ों बहनों की तकलीफ है। जिनके भाई सडक़ दुर्घटनाओं में दुनिया छोडक़र जा चुके हैं। ऐसे में बहनें अपने भाइयों को बाइक सुरक्षित चलाने के लिए हेलमेट खरीदकर उपहार में देने की तैयारी में हैं।
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अमर उजाला, लक्ष्मी टॉवर, नियर अंबेडकर चौराहा, सिविल लाइंस, प्रतापगढ़।