साहूमई के सूरज श्रीवास्तव की मौत के बाद रविवार को हुए बवाल के तीसरे दिन गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है। वहीं आसपास के गांव के लोगों में पुलिस की कार्रवाई को लेकर गुस्सा है। भले ही पुलिस सुसाइड नोट जारी करते हुए मृतक के परिजनों की गलती ठहरा रही है लेकिन लोग अबोध बच्चों के साथ जेल भेजी गई परिवार की महिलाओं को बेकसूर बता रहे हैं।
मानिकपुर के साहूमई में शुक्रवार को जहरीला पदार्थ खाने से 24 वर्षीय सूरज श्रीवास्तव की मौत हो गई थी। मृतक की मां सुनीता ने बेटे की जेब में मिली पर्ची को दिखाते हुए गांव के ही प्रधानपति समेत तीन लोगों पर हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई। कार्रवाई की जिद पर अड़े परिजन रविवार को शव लेकर प्रदर्शन के लिए निकले। जिसे रोकने के दौरान पुलिस से विवाद हो गया।
आक्रोशित लोगों ने पुलिस पर हमला कर दिया। पुलिस अफसरों का दावा रहा कि हमले में थानाध्यक्ष समेत 12 पुलिसकर्मी घायल हुए। एसओ की तहरीर पर पुलिस ने 55 लोगों के खिलाफ बलवा, सरकारी कार्य में बाधा, मोबाइल छिनैती समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए मृतक सूरज के माता-पिता के अलावा परिवार व करीबी 23 लोगों को जेल भेज दिया। देर शाम मृतक का सुसाइड नोट भी जारी किया। जिसमे वह माता पिता से माफी मांगते हुए खुदकुशी की बात लिखी है।
बवाल के बाद पुलिस की कार्रवाई से गांव के लोग सहमे हुए हैं। पंचायत भवन में रखा बिस्तर वैसे ही पड़ा है। मृतक के बाबा देवीदयाल भी आज घर पर नहीं हैं। उन्हें रिश्तेदार अपने साथ ले गए। गांव में केवल वृद्ध पुरुष और महिलाएं ही बचे हैं। इलाके के लोग मासूम बच्चों के साथ जेल भेजी गई महिलाओं को लेकर ही चर्चा में मशगूल नजर आए।