जिले में बुधवार को कोरोना वायरस को लेकर आम लोगों में खौफ देखने को मिला। सरकारी कार्यालयों में गांव से आने वाली वह भीड़ अब देखने को नहीं मिल रही है, जो दिनभर उमड़ी रहती थी। बैंकों में सरवर डाउन होने की बात कहकर ग्राहकों को लौटाया जाता रहा। सिर्फ डाकघर में आधारकार्ड बनवाने के लिए भीड़ जुटी थी।
स्थान : विकास भवन मुख्य द्वार : 02.08 बजे
विकास भवन के प्रवेश द्वार पर प्राय: कर्मचारियों का जमावड़ा लगा रहता है। आने-जाने वाले फरियादी भी यही बैठकर अपनी थकान मिटाते हैं, मगर बुधवार को दोपहर 2.08 बजे मुख्य द्वार पर सन्नाटा पसरा रहा। सुरक्षाकर्मी इधर-उधर चक्कर लगा रहा था। आने-जाने वालों पर भी वह बराबर नजर रख रहा था, मगर जांच के लिए कोई बंदोबस्त नहीं किया गया था।
डीडीओ कार्यालय : दोपहर 2.09 बजे
जिला विकास अधिकारी कार्यालय में प्रशासनिक अधिकारी अजय श्रीवास्तव अपनी कुर्सी पर बैठकर कामकाज निपटा रहे थे। जबकि सहयोगी कर्मचारी भी अपनी सीट पर बैठे हुए थे। बड़े से हाल में सिर्फ कर्मचारी ही दिख रहे थे। इस कार्यालय में प्राय: जिले के 17 ब्लाकों से आने कर्मचारियों और शिकायतकर्ताओं की लंबी लाइन लगी रहती थी। मगर बुधवार को कार्यालय में पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा।
आरईएस विभाग : दोपहर 2.11 बजे
ठेकेदारों से प्राय: भरे रहने वाले आरईएस विभाग में कर्मचारियों के सिवा कोई नहीं देखने को मिला। अपनी-अपनी सीट पर बैठे कर्मचारी विभागीय कार्य निपटाते रहे, मगर न तो ठेकेदारों का दखल था और न ही किसी अधिकारी के आने का भय था। हां इतना अवश्य था कि कोरोना वायरस को लेकर कर्मचारी आपस में चर्चा करते मिले। कोई सोशल मीडिया पर चलने वाले वीडियो को शेयर कर रहा था तो कोई लिखित आदेश दिखा रहा था।
सहायक निबंधक, सहकारिता : दोपहर 2.13 बजे
विकास भवन के सहायक निबंधक सहकारिता के कार्यालय में पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा। एक टेबल पर तीन कर्मचारी आपस में कोरोना के भयावह स्वरूप की चर्चा करते मिले तो अधिकांश सीटें खाली रहीं। हालांकि कर्मचारियों ने बताया कि लंच हुआ है। साहब और कर्मचारी खाना खाने गए हुए हैं। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक कर्मचारी ने कहा कि इतना सब सुनने के बाद भी कर्मचारियों को सुरक्षित करने के लिए अभी तक विकास भवन में कोई पहल नहीं हुई है। अधिकारी अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा कर रहे हैं, मगर उन्हें कर्मचारियों की चिंता नहीं है।
पीडब्लूडी : दोपहर 2.27 बजे
लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के कार्यालय में प्राय: कर्मचारियों और ठेकेदारों का जमावड़ा रहता है। कोई भुगतान के लिए तो कोई नए टेंडर की जानकारी करने के लिए दिनभर आता रहता है। बुधवार को कार्यालय में पूरी तरह सन्नाटा पसरा नजर आया। लिपिक अनिल पांडेय अपने साथियों के साथ विभाग का कामकाज निपटाते रहे, मगर ठेकेदारों की संख्या नगण्य रही।
सिंचाई विभाग : दोपहर 2.31 बजे
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता कार्यालय में प्रधान लिपिक त्रिवेणी प्रसाद पांडेय अपनी सीट में बैठकर अपने दो सहयोगियों के साथ विभाग का कामकाज निपटाते दिखे, जबकि विभाग में आने वाले किसान एक भी नहीं दिखाई दिए। अधीक्षण अभियंता भी कोरोना वायरस से खौफजदा दिखे, वह कार्यालय में बैठने के बजाए अपने आवास पर जमे रहे।
प्रधान डाकघर : दोपहर 2.36 बजे
बुधवार की दोपहर में सरकारी कार्यालयों की पड़ताल में सिर्फ प्रधान डाकघर में ग्राहकों की भीड़ देखने को मिली। कुछ ग्राहक रुपये जमा करने और निकालने में जुटे हुए थे तो कुछ लोग आधारकार्ड में संशोधन कराने के लिए काउंटर पर जमा थे। ग्राहक अपनी बारी की प्रतीक्षा में थे। हालांकि कोरोना से निपटने के लिए कोई सावधानी नहीं बरती जा रही थी।
डीडीओ कार्यालय में दो बजकर नौ मिनट पर काम करते कर्मचारी।- फोटो : PRATAPGARH
विकास भवन परिसर गेट दो बजकर आठ मिनट पर सन्नाटा।- फोटो : PRATAPGARH