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प्रतापगढ़ में टीकाकरण टीम देखकर घर के दरवाजे बंद कर ले रहे लोग 

Mon, 24 May 2021 02:10 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़

सार

  • ग्रामीण इलाकों में वैक्सीन लगने से मौत और नपुंसक होने की अफवाहें, मुनादी और डोर टू डोर संपर्क के बाद भी नहीं हो रहे तैयार 
  • वैक्सीनेशन टीम से नोकझोंक कर ले रहे लोग, कहीं सरकार की साजिश बताकर किया जा रहा ग्रामीणों को गुमराह  
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कोरोना टीका - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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कोरोना संक्रमण पर काबू पाने के लिए अधिक से अधिक आबादी के टीकाकरण की मुहिम में जुटे स्वास्थ्य विभाग के सामने नई मुश्किल खड़ी हो गई है। ग्रामीण इलाकों में कोरोना वैक्सीन लगने के बाद मौत और नपुंसक होने जैसी अफवाहों ने वैक्सीनेशन अभियान में लगे अफसरों की चिंता बढ़ा दी है। तेजी से अफवाहें फैलने के बाद ग्रामीण टीकाकरण टीम को देखते ही अपने घरों के दरवाजे बंद कर ले रहे हैं। मुनादी, डोर टू डोर संपर्क और शिविर लगाने के बाद भी लोग टीका लगवाने के लिए तैयार नहीं हैं। हाल के दिनों में प्रयागराज के साथ ही प्रतापगढ़ और कौशाम्बी के कई गांवों में इस तरह के मामले सामने आए हैं।  

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स्वास्थ्य सेवा से जुड़े विशेषज्ञों की राय है कि अधिक से अधिक लोगों को वैक्सीन देकर ही कोरोना की चेन तोड़ी जा सकती है। केंद्र और राज्य सरकार भी संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए टीकाकरण पर जोर दे रही है। प्रदेश में एक जून से सभी जिलों में 18 वर्ष से ऊपर के लोगों वैक्सीन देने की तैयारी है, लेकिन इन सबके बीच ग्रामीण इलाकों में फैलीं अफवाहों ने टीकाकरण की राह में अचड़न पैदा कर दी है। प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और प्रयागराज जिले के प्रभारी मंत्री डा. महेंद्र सिंह के पैतृक गांव प्रतापगढ़ जिले के करमाही गांव में तीन दिन पहले आंगनबाड़ी केंद्र पर ग्रामीणों के टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैंप लगाया था।

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इस बीच किसी ने अफवाह फैला दी कि वैक्सीन लगवाने से कुछ दिन पहले गांव के एक बुजुर्ग की मौत हो गई थी। जबकि हकीकत यह है बुुजुर्ग ने तीन महीने पहले वैक्सीन लगवाई थी और बीमारी के चलते उसकी स्वाभाविक मौत हुई थी। टीकाकरण टीम दोपहर दो बजे तक इंतजार करती रही, लेकिन एक भी व्यक्ति टीका लगवाने के लिए नहीं पहुंचा। इसी तरह प्रतापगढ़ के ही खूझी कला गांव की दलित बस्ती में लोगों ने यह कहते हुए टीका लगवाने से इनकार कर दिया कि बीस दिन पहले वैक्सीन लेने के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मौत हो गई थी। इसलिए हम लोग वैक्सीन नहीं लगवाएंगे।

 बाबा बेलखरनाथधाम सीएचसी के अधीक्षक डॉ. आरिफ हुसैन ने बताया कि लोगों को गुमराह कर दिया गया है कि वैक्सीन लगवाने से मौत हो जा रही है और नपुंसकता आ जाती है। लोगों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी तरह प्रतापगढ़ के ही लालगंज इलाके के रायपुर तियाई, जगन्नाथपुर, सारीपुर, बछवल, असरही, खानापट्टी, खालसा सादात, कला भदारी, हुलासगढ़ में भी लोग वैक्सीन लगवाने के लिए तैयार नहीं हैं। ग्रामीणों पर अफवाह इस कदर हावी है कि वे सीधे कह रहे हैं वैक्सीन लगवाकर मरना नहीं । कुंडा इलाके के कालाकांकर सीएचसी से जुड़े मानिकपुर, परियावां, इब्राहिमपुर, सोनामऊ, लवाना, दयालपुर, नवाबगंज आदि गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने टीकाकरण के लिए कैंप लगाया, लेकिन अधिकांश लोग वैक्सीन लगवाने के लिए तैयार नहीं हुए। कालाकांकर सीएचसी अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार वर्मा ने बताया कि लोगों के मन में वैक्सीन को लेकर कुछ भ्रांतियां हैं। उन्हें समझाने का प्रयास किया जा रहा है।
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vaccine - फोटो : अमर उजाला
प्रयागराज जिले के ग्रामीण इलाकों में हालात कुछ ऐसे ही हैं। ग्रामीणों को इस कदर गुमराह किया गया है कि वे वैक्सीन लगाने के लिए पहुंच रहे स्वास्थ्य कर्मियों से मारपीट पर उतारू हो जा रहे हैं। कोरांव इलाके के बड़ोखर गांव में एक बुजुर्ग ने यह कहते हुए वैक्सीन लगवाने से मना कर दिया कि हमें मारने की योजना बनाई जा रही है। गांव के ही एक अन्य बुुुजुर्ग ने इसे सरकार की साजिश बताते हुए टीकाकरण से इनकार कर दिया। सीएचसी कोरांव के अधीक्षक डॉ. जयकिशन सोनकर ने बताया कि क्षेत्र के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर टीकाकरण से मौत की अफवाहों के कारण वैक्सीनेशन टीम और ग्रामीणों के बीच नोकझोंक हुई है। लोगों को समझाकर टीकाकरण किया जा रहा है।   

प्रयागराज के ही लालगोपालगंज इलाके के मेंडारा, श्रृंगवेरपुर, कचहना, मलंग की तकिया, पलएं, बलाऊ क पुरवा आदि गांवों में भी ग्रामीण वैक्सीन लगवाने के लिए तैयार नहीं हैं। नवाबगंज इलाके के रामपुर, दुबरा जगदीशपुर में भी लोगों ने टीका लगवाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद रामपुर गांव में डीएम और कमिश्नर की पहल पर निगरानी समिति की बैठक में लोगों को समझाया गया।  

एक दिन पहले कराई मुनादी, घरों में ताला बंदकर चले गए लोग 

कौशाम्बी जिले के कड़ा ब्लाक के कंथुआ गांव में भी वैक्सीन को लेकर फैलाई गईं अफवाहों के कारण लोग डरे हुए हैं और टीका लगवाने के लिए तैयार नहीं हैं। गांव में लोगों का टीकाकरण करने के लिए बीस मई को कैंप लगाया गया। इससे पहले 19 मई को गांव में मुनादी कर लोगों को इसकी जानकारी दी गई थी। इसके बाद भी टीका लगावने के लिए एक भी व्यक्ति शिविर में नहीं पहुंचा। गांव में बनाई गई निगरानी समिति के साथ कड़ा सीएचसी अधीक्षक ने डोर टू डोर संपर्क किया। फिर भी कोई टीका लगवाने के लिए तैयार नहीं हुआ। दोबारा संपर्क करने गए सीएचसी अधीक्षक को अधिकतर घरों में ताला लटकता मिला। कुछ घरों में सिर्फ बच्चे मौजूद थे। उन्होंने बताया कि सभी लोग खेत चले गए हैं। इसी तरह कौशांबी जिले के ही मूरतगंज ब्लाक के लोहरा गांव में एक अप्रैल को लगे शिविर में किसी ने वैक्सीन नहीं लगवाई। दोबारा शिविर लगाने पर काफी मशक्कत के बाद सिर्फ छह लोग टीका लगवाने के लिए तैयार हुए। 

पांच हजार की आबादी वाले गांव में तीन बार लगा शिविर, सिर्फ 26 लोगों ने लगवाई वैक्सीन 

कौशाम्बी जिले के नेवादा ब्लाक के पुरखास गांव में स्वास्थ्य विभाग ने वैक्सीन लगाने के लिए तीन बार शिविर लगाया। इस गांव की आबादी करीब पांच हजार है। तीन बार कैंप लगाने के बाद भी गांव में सिर्फ 26 लोग टीका लगवाने के लिए तैयार हुए।  

मुस्लिम बहुल इलाकों में दिक्कत ज्यादा 

स्वास्थ्य विभाग की टीम को मुस्लिम बहुल इलाकों में टीकाकरण में ज्यादा दिक्कत आ रही है। लोगों के मन में इस कदर भ्रांतियां हैं कि वे टीका लगवाने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हैं। लोग टीका लगवाने से साफ-साफ मना कर दे रहे हैं। प्रयागराज जिले के गंगापार इलाके के कनिहार-लंगड़ीपुर, हनुमानगंज, फतुहां आदि गांवों में लोग टीकाकरण से दूरी बना रहे हैं। मलावां बुजुर्ग, मलावां खुर्द, बहादुरपुर कछार, कसेरूआ खुर्द, हेतापट्टी सरायशंकर, नई झूंसी, पुरानी झूंसी में भी कमोवेश यही हालात हैं। कनिहार ग्रामसभा के प्रधानपति सुनील कुशवाहा, रामनगर गांव के प्रधान मनीष गुप्ता ने बताया कि काफी समझाने के बाद भी लोग टीका लगवाने के लिए तैयार नहीं हैं।
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