शासनादेश जारी होते ही घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं की जेब पर खासा भार बढ़ गया है। उनके विद्युत बिल अचानक दोगुना हो गए हैं। यह बढ़ा बिल पाकर सारे लोग हैरान और परेशान हैं। ग्रामीणों का मानना है कि विभाग ने शहरी और ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं को एक श्रेणी में खड़ा कर दिया है। इन उपभोक्ताओं को दो किलोवाट का कनेक्शन धारक मान लिया गया है।
घरेलू लाइट कनेक्शन के नाम पर मौज कर रहे उपभोक्ताओं पर विद्युत विभाग ने अचानक अपना शिकंजा कस दिया है। ऐसे में महज तीन सौ रुपये में दो माह बिजली जलाने वालों के बिल अचानक आठ सौ पार कर गए हैं। यह बिल पाकर उपभोक्ता भौचक हैं। वे आसपास के दूसरे उपभोक्ताओं से संपर्क कर हकीकत खंगाल रहे हैं। मगर पता चल रहा है कि सबकी हालत वही है।
कुछ तो एसडीओ कार्यालय जाकर पता कर रहे हैं कि कहीं गलती से बिल में यह बढ़ोतरी तो नहीं हो गई। लेकिन जब उन्हें बताया जा रहा कि बिल सही है तो वे निराश हो रहे हैं। प्रदेश सरकार ने एक नया शासनादेश जारी कर घरेलू व शहरी उपभोक्ताओं को बराबर कर दिया है। इसके तहत मीटर लगाए जाने हैं। उसके आधार पर बिल आना है। अभी तत्काल पर विभाग ने घरेलू उपभोक्ताओं को एक किलोवाट की जगह दो किलोवाट का उपभोक्ता मानकर अक्तूबर माह से बढ़े बिल जारी कर दिए हैं।
यही बिल लोगों को माह जनवरी 2015 में भुगतान के लिए मिले हैं। शासन के नए आदेश से तहसील मुख्यालय व ग्रामीण अंचल के हजारों उपभोक्ताओं की जेब पर भार बढ़ गया है। इस बाबत अधिशासी अभियंता विद्युत एसएन मिश्र ने बताया कि शासनादेश जारी होने के बाद विभाग ने यह बिल भेजे हैं। इस मामले में उपभोक्ताओं को राहत मीटर लगने के बाद ही मिल पाएगी। हालांकि हाल में आए शासनादेश के तहत मार्च तक यह बढ़े बिल रोक दिए गए हैं। उसके बाद शासन के निर्देश पर कार्रवाई होगी।