घटना स्थल से लालूपट्टी तक मची रही चीख-पुकार, बिलखते रहे परिजन
लालगंज। श्रद्धालुओं से भरा लोडर के पलटने के बाद घटनास्थल भेभौरा से लालूपट्टी और ट्रामा सेंटर तक चीख-पुकार मची रही। श्रद्धालु लहूलुहान होकर कराह रहे थे। ग्रामीणों ने मदद को हाथ बढ़ाए। लोगों को उठाए जाने के दौरान पुलिस आ गई। एंबुलेंस नहीं पहुंची तो सूचना पर पहुंची पुलिस ने पलटे लोडर को सीधा कराया। इसी लोडर से घायलों को ट्रामा सेंटर पहुंचाया। इसके बाद पहुंची तीन एंबुलेंस से अन्य घायलों को ले जाया गया।
दो श्रद्धालुओं की मौत और उन्नीस के घायल होने से घटना स्थल से लेकर श्रद्धालुओं के गांव लालूपट्टी तक चीखपुकार मच गई। हादसे के बाद मौके पर पड़े लहूलुहान श्रद्धालु कराह रहे थे। सबसे पहले मौके पर दरोगा राजेश कुमार पहुंचे। घायलों को अस्पताल ले जाने की व्यवस्था नहीं देख पलटे पड़े लोडर की मदद से दरोगा ने गंभीर रूप से घायलों को ट्रामा सेंटर पहुंचाया। इसके बाद तीन एंबुलेंस पहुंची और घायलों को ले जाया गया।
घटनास्थल पर आधे घंटे तक कराहते हुए लोग तड़पते रहे। इसके बाद ट्रामा सेंटर में चीखपुकार के बीच घायलों और मृतकों के परिजन एक-दूसरे की हालत देखकर बिलखते रहे। कोमल व सीमा के शव के पास परिजन दहाड़े मारकर रो रहे थे। परिजनों को अपने घायल होने से अधिक दर्द दोनों युवतियों की मौत का था। पुलिस व स्वास्थ्य कर्मियों ने परिजनों को ढांढस बंधाया।
श्रद्धालुओं के गांव जब हादसे की खबर पहुंची तो वहां से भी लोग हड़बड़ी में लालगंज ट्रामा सेंटर जाने को भागे। घरों में महिलाएं रोने लगीं। पड़ोसी घायलों के घर पहुंच गए। रो रहे लोगों को अगल बगल वालों ने संभाला। रोने बिलखने लगे। पीड़ित परिवारों के लोगों को कुछ सूझ ही नहीं रहा था कि वह क्या करें। मौके से लेकर ट्रामा सेंटर व लालूपट्टी तक कोहराम व चीख पुकार सुनकर वहां मौजूद लोगों का कलेजा फट रहा था। संवाद
रास्ते में घर न होता तो बच जाती कोमल की जान
लालगंज। दर्दनाक हादसे में जाने गंवाने वाली कोमल सरोज को उसकी मौत ही खींच ले गई थी। कोमल लालगंज कोतवाली के शिवा वैश्य पूरे जोधा की रहने वाली थी। पिता सुरेश सरोज खेती किसानी करते हैं। वह तीन बहनों में सबसे छोटी थी। बड़ी बहन नेहा की शादी लालूपट्टी में हुई थी। बहन की ससुराल से कोमल के पास फोन आया कि उसके यहां से लोग घुइसरनाथ धाम जा रहे हैं। रास्ते में कोमल का घर पड़ता था, इस वजह से वह भी उनके साथ जाने को तैयार हो गई। कोमल ने परिजनों को बताया था कि वापस आते समय वह घर पर उतर जाएगी। किसी को क्या मालूम था कि हादसे में उसकी जान चली जाएगी। कोमल की मौत की सूचना जब उसके परिजनों को हुई तो वे सकते में आ गए। रोते-बिलखते परिजन यह कहते सुने गए कि रास्ते में घर नहीं पड़ता तो कोमल उनके साथ नहीं जाती और उसकी जान बच जाती। संवाद
सामान ढोने के परमिट पर सवारियां ढो रहा था लोडर ...
लालगंज। जिस लोडर से हुए हादसे में दो श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई और उन्नीस लोग घायल हो गए, उसका सवारियां ढोने का परमिट नहीं था। आरटीओ कार्यालय में यह वाहन सामान ढोने के लिए पंजीकृत है। चालक मनोज कुमार का घर भी लालूपट्टी में पड़ता है, जिसे बाबा धाम जाने के लिए बुक किया गया था। लोडर पर दस सवारियों को बैठने की जगह नहीं थी, इसके बाद भी 21 लोगों को भूसे की तरह भरा गया था। कुछ लोग लोडर पर पीछे बैठे थे, जगह नहीं मिली तो डाले पर भी लड़कियां व बच्चे सहारा लेकर बैठे थे। खचाखच भरा लोडर तेज गति से बाबा धाम जा रहा था। इस बीच लालगंज के भेभौरा के समीप मोड़ पर चालक रफ्तार की वजह से नियंत्रण खो बैठा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तेज रफ्तार और ओवरलोडिंग की वजह से लोडर का पीछे वाला डाला खुल गया और लोग सड़क पर गिरने लगे। इस बीच चालक नियंत्रण खो बैठा और दर्दनाक हादसा हो गया। संवाद
मां के इलाज के लिए अपना दर्द भूला मासूम बेटा
लालगंज। भेभौरा के समीप हुए हादसे में दस वर्षीय अभिषेक सरोज व उसकी मां राजकली भी घायल हुए। हादसे के बाद राजकली अचेत हो गई। ट्रामा सेंटर में पहुंचने पर मां की हालत गंभीर देख लहूलुहान बेटा अभिषेक अपना दर्द भूल गया। पुलिस व स्वास्थ्य कर्मी अभिषेक का इलाज करने लगे तो उसने मना करते हुए मां राजकली को जिला अस्पताल रेफर करने की जिद पकड़ ली। काफी प्रयास के बाद भी वह इलाज के लिए तैयार नहीं हुआ। चिकित्सकों ने राजकली को रेफर किया तब खून से लथपथ अभिषेक एंबुलेंस में जाकर बैठ गया। उसने प्राथमिक उपचार भी नहीं कराया, बस चिल्लाता रहो कि मेरी मां की जान बचा लो। संवाद
...
कितनी मौतों के बाद टूटेगी नींद, हादसे के बाद भी फर्राटे भर रहे ओवरलोड लोडर
संवाद न्यूज एजेंसी
लालगंज। ओवरलोड और खस्ताहाल ऑटो की वजह लगातार हो रहे हादसों के बाद भी प्रशासन व पुलिस की नींद नहीं टूट रही है। सड़कों पर ऑटो चालक बेखौफ होकर ओवरलोड सवारियां बैठाकर फर्राटा भरते हैं। राहगीरों व नौनिहालों की जान से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ जिम्मेदार विभाग के अधिकारी कार्रवाई ही नहीं करते। किसी बड़े हादसे के बाद एक से दो दिन ही जांच और चालान की खानापूरी की जाती है।
लालगंज क्षेत्र में लगातार हादसे हो रहे हैं। लीलापुर के मोहनगंज बाजार में बीती दस जुलाई को टैंकर की चपेट में आने से ऑॅटो सवार 12 सवारियों की मौत हो गई थी। हादसे में कई लोग घायल भी हुए थे। जांच में ऑटो के ओवरलोड होने की बात सामने आई थी, लेकिन पुलिस ने ओवरलोड वाहनों पर कोई कार्रवाई नहीं की।
बीते सोमवार को लालगंज तहसील के लक्ष्मणुपर में छात्रों को लेकर स्कूल जा रही ओवरलोड मैजिक सामने से आ रही लोडर की चपेट में आने से दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। हादसे में एक छात्रा की मौत हो गई और तेरह बच्चे घायल हुए थे। बृहस्पतिवार को लीलापुर के इटौरी में अनफिट स्कूली वाहन खड्डे में चला गया था। जिसमें आठ बच्चे बाल-बाल बचे।
इन हादसों से लालगंज सर्किल की पुलिस ने सबक नहीं लिया। पुलिस की लापरवाही से फर्राटा भर से ऑटो चालक क्षमता से अधिक सवारियां बैठाकर लोगों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। शुक्रवार को लालगंज के भेभौरा में हुआ हादसा भी पुलिस की लापरवाही का परिणाम माना जा रहा है।
योगी सरकार ने ट्रैक्टर व मालवाहक वाहनों से सवारियां ढोने पर पाबंदी लगाई है। ऐसे में लोडर पर 21 सवारियां को बैठाया गया और किसी की नजर नहीं पड़ी। यह लोडर उसी रास्ते पर जा रहा था, जिसे कांवड़ यात्रा के लिए सुरक्षित रखा गया है। जहां हादसा हुआ वहां से सौ मीटर दूरी पर पुलिस का बैरिकेडिंग भी है। इसके बाद भी सवारियों से भरा लोडर पुलिस की आंख के सामने से निकलता है और हादसे का शिकार हो जाता है।