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जिले भर में निकले 663 ताजिया

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Sadness of Gunji or Ali or Hussain
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इस्लाम जिंदा होता है हर करबला के बाद, या अली या हुसैन की सदाओं के बीच मगलवार को मोहर्रम का जुलूस शहर व ग्रामीण अंचलों के कदीमी रास्तों पर निकाला गया। अखाड़ों के खिलाड़ियों के हैरतअंगेज करतब देख हर कोई दांतों तले अंगुली दबाने को मजबूर हो गया। अकीदतमंदों ने 142 कर्बला में ताजिया दफनाने के साथ ही फूलों को भी सुपुर्दे खाक किया। इस दौरान सुरक्षा के लिए कड़ा इंतजाम किया गया था। अफसर जुलूस के बारे में लगातार जानकारी लेते रहे।
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पैगंबर- ए-इस्लाम के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की कर्बला में शहादत को लेकर मंगलवार को मोहर्रम का जुलूस शान- ओ- शौकत के साथ शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों में निकाला गया। शहर के खुशखुशवापुर से मोहर्रम का जुलूस निकला। जुलूस भंगवा चुंगी होते हुए पुराना माल गोदाम रोड पहुंचा। टक्करगंज से भी लोग जुलूस में शामिल हुए। वहां पहले से ही तैयार अकीदतमंद अपने अलम, ताजिए और झांकियों के साथ जुलूस में शामिल हुए।
तहसील के रास्ते सभी पंजाबी मार्केट होते हुए श्रीराम तिराहा होकर चौक घंटाघर पहुंचे। शाही इमामबाड़े पर लोगों ने झंडा फहराया। आज के दिन लोगों ने रोजा रखा और खुदा की बारगाह में सजदा कर दुआ मांगी। अंधेरा होने से पहले ढोल ताशों के मातमी माहौल के बीच अंजुमन आशिकाने रसूल, अंजुमन रजा ए हुसैन, मोहर्रम कमेटी, शहीन अखाड़ा गोड़ें से निकला जुलूस कर्बला पहुंचा। जुलूस में डंका, अलम, नगाड़ा, ताजिया, दुलदुल घोड़े के साथ ही सबीहे भी शामिल रहे।
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देर शाम चिलबिला स्थित कर्बला में सैकड़ों ताजिए और उसके फूल एहतराम के साथ दफनाए गए। इस दौरान लंगर में लोगों को खाना भी दिया जाता रहा, जिसे लेने के लिए हर कोई बेकरार था। जुलूस चौक पहुंचा तो हर कोई अपलक उसे निहारते दिखा। महिलाओं और बच्चों की भीड़ काफी देर तक डटी रही। मातमपुर्सी के बीच लोग सीनाजनी करते रहे। हर कोई या अली या हुसैन की सदाएं बुलंद कर रहा था। जुलूस में करीब आधे किलोमीटर तक तिल रखने की जगह नहीं थी।
इस मौके पर रज्जब अली, हाजी मिनहाज, हैदर अली, बरकत अली, मुहीब उल्ला, इरशाद सिद्दीकी, लईक भाई, इख्तियार अली, निसार, बबलू, शकील, अकबर, अफजल, कौशर समेत अन्य लोग मौजूद रहे। जुलूस के पीछे-पीछे नगर कोतवाल चौकी प्रभारियों के साथ मुस्तैद रहे। सीओ सिटी अतुल शर्मा लगातार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी चेक करते रहे। मकंद्रूगंज पुलिस चौकी से अफसर बराबर जानकारी करते रहे।
तलवारबाजी देख हर कोई रह गया दंग
मोहर्रम पर मातमी माहौल के बीच अखाड़ों के युवकों ने अपने हैरतअंगेज कारनामे से लोगों को दंग कर दिया। हर कोई हुसैन के गम से गमजदा रहा। लोको अखाड़ा पुराना माल गोदाम रोड, पल्टन बाजार अखाड़ा, शहीन अखाड़ा गोंड़े समेत अन्य अखाड़ों के युवाओं ने लाठी, बनेटी, तलवारबाजी, आग का गोला, बिजली के ट्यूब समेत अन्य कलाओं का प्रदर्शन कर लोगों को दंग कर दिया।
बच्चों ने भी किया जंजीरी मातम
प्रतापगढ़ सिटी में शिया समुदाय के संगठन अंजुमन ए हैदरी नेे जंजीरी मातम किया। इसमें खूनी प्रदर्शन देख लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। छोटे-छोटे बच्चों ने भी हैरतअंगेज मातम पेश कर ठंड मेें भी गर्मी पैदा कर हुसैन पर जान न्यौछावर करने वालों की जिंदादिली का एहसास दिलाया। खूनी मातम में जंजीरी, ब्लेड से अपने शरीर को जख्मी कर लोग खुद को खून से सराबोर कर रहे थे। उनके जख्मों पर बराबर केवड़ा छिड़का जाता रहा। इसी तरह सुन्नी समुदाय के लोगों ने ताजिया और ढोल के साथ कस्बे मेें घूमकर सभी इमामबाड़ों मेें रुककर फातिहा पढ़ा।
जिले भर में निकले 663 ताजिया
मोहर्रम पर जिले भर में 663 ताजिया निकाले गए। नगर कोतवाली क्षेत्र में ही 75 अधिक ताजिया निकाले गए। शाम को ताजिया दफन करने का सिलसिला शुरू हुआ और देर तक चलता रहा। मन्नत वाला ताजिया अलग से जुलूस में शामिल हुआ।

Sadness of Gunji or Ali or Hussain- फोटो : PRATAPGARH

लालगंज में मोहर्रम पर निकला ताजिया का जुलूस।- फोटो : PRATAPGARH

Sadness of Gunji or Ali or Hussain- फोटो : PRATAPGARH

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