जिले के सांसदों को इस वर्ष विकास कार्य कराने के लिए बजट नहीं मिलेगा। उन्हें अभी एक वर्ष और इंतजार करना होगा। वर्ष 2022-23 में उन्हें सांसद निधि के रूप में पांच-पांच करोड़ रुपये मिलेंगे। कोरोना संक्रमण काल ने विधायकों और सांसदों को 44 करोड़ रुपये का झटका दिया है।
जिले के दोनों सांसदों को चालू वित्तीय वर्ष में सांसद निधि के रूप में मिलने वाले पांच-पांच करोड़ रुपये नहीं मिलेंगे। उन्हें अपने क्षेत्र में विकास कार्य कराने के लिए अभी एक वर्ष का इंतजार करना होगा। हालांकि विधायक निधि आने की जानकारी होते ही सांसद के करीबी यह जानने के लिए परेशान रहे कि सांसद निधि में कितनी धनराशि आई है। मगर शासन ने पहले से ही सांसद निधि पर दो वर्ष के लिए रोक लगा रखी है। वर्ष 2022-23 में सांसद निधि के रूप में पांच-पांच करोड़ रुपये मिलेंगे। कोरोना संक्रमण काल में जिले को 44 करोड़ रुपये का झटका लगा है।
जिले के सात विधायकों और एक एमएलसी को एक वर्ष में 24 करोड़ रुपये मिलते हैं। जबकि एक सांसद को एक वर्ष में पांच करोड़ रुपये मिलते हैं। इस प्रकार दोनों सांसदों को दो वर्षों में 20 करोड़ रुपये से हाथ धोना पड़ा। जिले के सांसदों के सामने समस्या यह है कि जिन समर्थकों से विकास कार्य कराने का वादा किए थे, अब उन्हें पूरा नहीं कर पा रहे हैं। सांसद निधि पर दो वर्ष के लिए रोक लगने से न विकास कार्य हो पा रहे हैं और न ही माननीय अपना वादा पूरा करने में सफल हो रहे हैं।
विकास भवन में डंप हैं प्रस्ताव
माननीयों को सांसद निधि भले ही नहीं मिली है, मगर प्रस्ताव पहले से ही डंप हैं। सांसद निधि नहीं आने से माननीयों से अधिक ठेकेदारों को चिंता सता रही है। उनकी नजर अब सीधे सांसद निधि पर टिकी हुई है।
सांसद निधि अभी नहीं आई है, विधायक निधि आ गई है। चालू वित्तीय वर्ष में सांसद निधि आने की संभावना नहीं है। अगले वित्तीय वर्ष में बजट आने पर सांसदों से प्रस्ताव मांगा जाएगा।
आरसी शर्मा, परियोजना निदेशक