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मगफिरत की सीधी राह है रोजा

Thu, 09 Jun 2016 12:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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मंजिल पर पहुंचना तब आसान हो जाता है जब राह सीधी हो। मजहबे इस्लाम में रोजा रहमत और राहत का रहबर (पथ-प्रदर्शक) है। रहमत से मुराद (आशय) अल्लाह की मेहरबानी से है और राहत का मतलब दिल के सुकून से है। अल्लाह की रहमत होती है तभी दिल को सुकून मिलता है। शेखजी मसजिद के पेश इमाम मौलाना फखरुज्जमा ने बताया कि दिल के सुकून का ताल्ल़ुक चूंकि नेकी और नेक अमल (सत्कर्म) से है। इसलिए जरूरी है कि आदमी नेकी के रास्ते पर चले।
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रोजा बुराइयों पर लगाम लगाता है और सीधी राह चलाता है। मगफिरत (मोक्ष) की मंजिल पर पहुंचने के लिए सीधी राह रोजा है। मगफिरत का मामला है अल्लाह का। यानी रोजा रखकर जब कोई शख़्स अपने गुस्से, लालच, जबान, जेहन और नफ्स पर (इंद्रियों पर) काबू रखता है तो वह सीधी राह पर ही चलता है। जैसा कि पहले भी कहा जा चुका है रोजा भूख-प्यास पर तो कंट्रोल है ही, घमंड, फ़रेब, (छल-कपट), फसाद (झगड़ा), बेईमानी, बदनीयती, बदगुमानी, बदतमीजी पर भी रोक लगाता है। वैसे तो रोजा है ही सब्र और हिम्मत-हौसले का पयाम। लेकिन रोजा सीधी राह का भी है ए़हतिमाम। नेकनीयत से रखा गया रोजा नूर का निशान है। अच्छे और सच्चे मुसलमान की पहचान है।

रोजा रखने के साथ तिलावत में मशगूल हैं रोजेदार
रमजान में रोजेदार रोजा रखने के साथ तिलावत में मशगूल हैं। घरों में महिलाएं तो मसजिदों में बाद नमाज कुरान पाक की तिलावत लोग करते नजर आ रहे हैं। अपने वालिैदन को रोजा व नमाज अदा करता देख छोटे बच्चे भी रोजा रखने की जिद करते रहे। कुछ मासूम बच्चों ने पहले दिन पूरा रोजा रखा लेकिन कुछ की हिम्मत दोपहर बाद जवाब दे गई।
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नमाजियों से गुलजार हैं मस्जिदें
पाक रमजान माह में लोग इबादत के लिए मस्जिदों में पांच वक्त की नमाज के साथ ही तरावीह की नमाज के लिए पहुंच रहे हैं। इससे गांव से लेकर शहर की हर छोटी बड़ी मस्जिदों में नमाज अदा करने वालों की चहल पहल दिखाई देती है। पाकीजगी के साथ वजू बनाकर नमाज अदा करना और फिर कुरान पाक की तिलावत करने के लिए लोगों का अधिकांश समय मसजिदों में गुजर रहा है। नौकरीपेशा लोग भी वक्त निकालकर इबादत करने में मशगूल हैं।
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