जिले की पुलिस की जान सांसत में है। पूरे जिले में चोरी, लूट समेत अन्य वारदातों को अंजाम देने वाले पांच हजार बदमाश पुलिस के लिए मुसीबत बने हुए हैं। इन बदमाशों पर नजर रखना पुलिस के लिए भारी पड़ रहा है। बदमाशों की तुलना में पुलिसकर्मियों की संख्या बहुत कम है। इनमें से बहुत से पुलिसकर्मी विभागीय कामों में व्यस्त रहते हैं। यही वजह है कि बदमाश जब जहां चाहें आसानी से वारदात को अंजाम दे रहे हैं। हर घटना के बाद बदमाशों की खोजबीन में भागदौड़ करने वाली पुलिस के पांव उखड़ जाते हैं।
जनपद की कुल आबादी करीब 34 लाख के है। आए दिन लूट, हत्या, छिनैती, चोरी, जानलेवा हमले की वारदातों से लोग सहमे हुए हैं। जिले में महिला थाना समेत 21 थाने हैं। मौजूदा समय में जिले में कुल एक हजार के करीब पुलिसकर्मी तैनात हैं। इनमें लगभग 32 कोतवाल, 75 दरोगा 103 मुख्य आरक्षी, 756 आरक्षी तैनात हैं। जबकि जिले में 15 साल के भीतर बदमाशों की संख्या आठ सौ से बढ़कर पांच हजार से अधिक पहुंच गई है। इनमें चोरी, छिनैती, डकैती, लूट, चेन स्नेचिंग, तार चोरी, पशु चोरी करने वाले छोटे-बड़े बदमाश हैं। इसके अलावा भाड़े पर हत्या करने व लूट के लिए हत्या करने वाले बदमाशों की संख्या भी 578 के करीब है। पुलिस चाहकर भी इन पर नजर नहीं रख पा रही है। यही पुलिसकर्मी विभागीय कामकाज के फेर में भी उलझे रहते हैं। घटनाओं के बाद ही पुलिस को पुराने और नए अपराधियों की याद आती है। जिले में हिस्ट्रीशीटरों की संख्या 1643 है। नगर कोतवाली में 90, लालगंज में 162 हिस्ट्रीशीटर हैं। उदयपुर थाने में 26 हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो जिले में अपराधियों की संख्या की तुलना में पुलनिस की संख्या बहुत कम है। ये तो पुलिसरिकार्ड वाले अपराधियों की संख्या है। इसके अलावा दूसरे छोटे बड़े अपराधियों का नाम भले ही पुलिस रिकार्ड में न दर्ज हो, लेकिन पुलिस को उनकी सरगर्मी से तलाश रहती है।
बहुत सी घटनाओं की दर्ज नहीं होती रिपोर्ट
जिले में बहुत सी घटनाओं की रिपोर्ट दर्ज करने में पुलिस आनाकानी करती है। खास बात यह है कि तार चोरी की 15 साल के भीतर केवल तार चोरी की 13 घटनाएं दर्शायी गईं, जबकि पिछले साल मानधाता, नगर कोतवाली, कंधई में ही दर्जन भर तार चोरी की घटनाएं हुई थीं। वाहन चोरी की संख्या भी बहुत कम है। जबकि शहर में आए दिन बाइक चोरी होती रहती हैं। कभी-कभार तो एक दिन में संख्या पांच तक पहुंच जाती है। यही हाल चेन स्नेचिंग के भी मामले में सामने आए हैं। पुलिस बहुत सी घटनाओं को तहरीर लेने के बाद पचा जाती है। टप्पेबाजी की घटनाओं का जिक्र तक नहीं है।
जिला बदर भी नहीं छोड़ते ठिकाना
जिले में आपराधिक गतिविधियों में लिप्त कई लोगों को पुलिस की संस्तुति के बाद जिला प्रशासन ने जिलाबदर कर रखा है। सभी को बकायदा नोटिस भी तामील कराया जाता है, लेकिन वह अपने ठिकाने पर ही मौजूद रहते हैं। पुलिस की संख्या कम होने के कारण उनकी निगरानी नहीं हो पाती। पुलिस की नजरों से बचने के लिए भले ही कुछ दिनों के लिए नोटिस मिलने के बाद हट जाएं, लेकिन बाद में अपने घर पहुंच जाते हैं।
फाइलों में दफन हो गईं बड़ी घटनाएं
जिले में घटित कई बड़ी घटनाएं फाइलों में कैद होकर रह गई हैं। नगर कोतवाली के संसारपुर जंगल में फरवरी माह में युवती की अधजली लाश का अभी तक पता नहीं चला सका। प्रकरण क्राइम ब्रांच के पास जांच के लिए पहुंचा, लेकिन वह भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची। बाद में फाइल आलमारी में कैद हो गई। कचहरी में सब रजिस्ट्रार कार्यालय में चोरी का खुलासा आज तक नहीं हो सका। कोहड़ौर थाना क्षेत्र में सात जनवरी को वाराणसी के रहने वाले प्रकाश यादव की हत्या की तह तक पुलिस नहीं पहुंच सकी। नगर कोतवाली के सिनेमा रोड पर सैलून की दुकान पर बैठे सपा नेता मनीष पाल के भाई आशीष पाल की हत्या का अभी तक खुलासा नहीं हो सका। जबकि एसटीएफ भी लगाई गई थी।
वांछितों ने पुलिस की नाक में कर रखा है दम
जनवरी 2018 में वांछितों की संख्या लगभग तीन सौ के करीब थी। एसपी के आदेश पर वांछितों की धरपकड़ चल रही है। मौजूदा समय में दौ सौ के करीब वांछितों की संख्या है। ये लंबे समय से पुलिस के हाथ नहीं लग रहे हैं। लूट, हत्या, छिनैती के फरार अपराधियों को खोजने में पुलिस बेदम हो चुकी है।
वारदातों का ग्राफ कम करने के लिए प्रतिदिन प्रयास किए जा रहे हैं। समय-समय पर क्राइम मीटिंग करके थानाध्यक्षों और बीट सिपाहियों को दिशा-निर्देश दिए जाते हैं। जिले में रिक्त पड़े सिपाहियों के पदों को भरने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं।
संतोष कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक, प्रतापगढ़।