Retired teachers did not show interest in teaching in GIC and model schools
शिक्षकों के अभाव से जूझ रहे मॉडल स्कूल व जीआईसी का संचालन रिटायर्ड शिक्षकों से कराने की पहल भले ही शुरू की गई है, मगर वह इसमें दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। महज 26 रिटायर्ड शिक्षकों ने आवेदन किया है, जबकि विद्यालयों में 200 से अधिक शिक्षकों की दरकार है। ऐसे में रिटायर्ड शिक्षकों से विद्यालयों के संचालन की कवायद फेल होती नजर आ रही है।
जिले में सात मॉडल स्कूल स्वीकृत हुए हैं। जिनमें चार का संचालन शुरू हुआ है। इसके अलावा 39 राजकीय विद्यालय हैं। विद्यालयों में प्रवक्ताओं के साथ शिक्षकों की भारी कमी है।
राजकीय विद्यालयों में 70 प्रतिशत शिक्षकों का अभाव है। यही वजह है कि मॉडल स्कूल व राजकीय विद्यालयों में पठन-पाठन का कार्य प्रभावित रहा है। विषय विशेषज्ञ शिक्षकों के अभाव के चलते बच्चों का कोर्स पूरा नहीं हो पाता है। इससे परीक्षा नजदीक आने पर बच्चों को कोचिंग का सहारा लेना पड़ता है। शिक्षकों की कमी के चलते लगातार विद्यालयों में पठन-पाठन की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। बोर्ड परीक्षा में बेल्हा मंडल व प्रदेश में कई पायदान नीचे खिसक चुका है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार मॉडल व राजकीय विद्यालयों को मिलाकर 200 से अधिक शिक्षकों की कमी है। शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए विभाग की ओर से रिटायर्ड शिक्षकों को मानदेय पर रखकर पठन-पाठन सामान्य बनाने की पहल शुरू की गई। विभाग की ओर से बाकायदा इसका विज्ञापन जारी किया गया। ताकि ज्यादा से ज्यादा आवेदन आ सकें, मगर ऐसा हुआ नहीं।
रिटायर्ड शिक्षकों ने मानदेय पर पठन-पाठन कार्य में रुचि नहीं दिखाई है। 200 के सापेक्ष महज 26 रिटायर्ड शिक्षकों के आवेदन आए हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. सर्वदानंद ने बताया कि इसकी विज्ञप्ति जारी की गई थी। जो भी आवेदन आए हैं, उनका साक्षात्कार पांच नवंबर को विकास भवन में होगा।