आतंकी घटनाओं के मद्देनजर गणतंत्र दिवस के पहले शासन ने पूरे प्रदेश में अलर्ट घोषित कर रखा है। सार्वजनिक स्थलों पर निगहबानी के लिए विशेष निर्देश जिला प्रशासन को दिया गया है। बावजूद इसके सार्वजनिक व धार्मिक स्थलों की निगहबानी नहीं की जा रही है। एक ओर प्रशासन सुरक्षा का दावा कर रहा हो लेकिन दूसरी ओर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
गणतंत्र दिवस को लेकर शासन ने अलर्ट घोषित करते हुए सार्वजनिक व धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा चुस्त करने का आदेश दिया है। अधिकारियों ने इस पर अमल के लिए मातहतों को विशेष चौकसी बरतने का आदेश दिया। मगर शासन व अधिकारियों के आदेश को मातहत तवज्जो नहीं दे रहे हैं। सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी तो दूर होमगार्ड भी नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसी दशा में कोई भी बड़ी वारदात को अंजाम देने के बाद संदिग्ध लोग आराम से निकल सकते है।
अधिकारियों ने खुफिया विभाग को भी नजर रखने का आदेश दिया है लेकिन खुफिया विभाग भी कागजी कोरम पूरा रहा है। शनिवार को सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए अमर उजाला की टीम निकली लेकिन हर ओर प्रशासन का सुरक्षा का दावा हवा हवाई ही निकला। रेलवे स्टेशन के सभी प्लेटफार्म पर दोपहर एक बजे से तीन बजे तक पुलिसकर्मी दूर-दूर तक नहीं दिखे। पोर्टिकों के बाहर से भी सिपाही भी गायब थे। रोडवेज बस डिपो पर कमोबेश यही हाल रहा। दूसरे जनपदों से आने वाले लोगों पर नजर नहीं रखी जा रही है।
जिला व महिला अस्पताल में भी नजारा ऐसा ही दिखा। अस्पताल के गार्ड भी अपने में व्यस्त दिखे। कौन आ रहा है, कौन जा रहा है। सुरक्षाकर्मियों से कोई लेना देना नहीं। बेल्हा देवी धाम व घुइसरनाथधाम में हर वर्ष सुरक्षा से जुड़े विशेष कमांडो जायजा लेने आते हैं लेकिन इसके बावजूद दोनों धार्मिक स्थलों पर सुरक्षाकर्मी तो दूर होमगार्ड भी नजर नहीं आए। बसंत पंचमी के चलते गंगा स्नान करने के लिए मानिकपुर, कालाकांकर घाट पर लोग पहुंचे थे। यहां भी सुरक्षा के लिए कोई प्रबंध नहीं दिखा।